बिहार 

मोतिहारी: शिक्षा विभाग में बड़ा खुलासा, दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटा रहे शिक्षक; जिलाधिकारी से गंभीर शिकायत

On: March 29, 2026 8:29 AM
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पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के शिक्षा विभाग में एक बार फिर नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का मामला सामने आया है। ताजा विवाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में शिक्षकों की अवैध तैनाती और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर है। बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) ने इस मामले में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?

​महासंघ का आरोप है कि शिक्षा सचिव के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, कई शिक्षकों को स्कूलों में पढ़ाने के बजाय DEO कार्यालय में बाबू (क्लर्क) का काम सौंपा गया है। नियमों के अनुसार, शिक्षकों की पहली जिम्मेदारी छात्रों को पढ़ाना है, लेकिन यहाँ वे कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलों और तकनीकी कार्यों का निपटारा कर रहे हैं।

​इन शिक्षकों के नाम आए सामने

​शिकायत पत्र में विशेष रूप से कुछ शिक्षकों के नामों का उल्लेख किया गया है जो कथित तौर पर अवैध रूप से कार्यालय में जमे हुए हैं:

  • मो० जहीरुद्दीन: ये परीक्षा विभाग (परीक्षा कोषांग) का काम देख रहे हैं।
  • मो० हारून राशिद: ये HRMS और CFMS जैसे तकनीकी और वित्तीय कार्यों को संभाल रहे हैं।
  • एमामुद्दीन उर्फ बेताब: आरोप है कि ये बिना किसी आधिकारिक आदेश के दफ्तर का काम कर रहे हैं।

​भ्रष्टाचार और ‘नजराने’ के गंभीर आरोप

​महासंघ के अध्यक्ष नासीर खान द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में केवल अवैध तैनाती ही नहीं, बल्कि आर्थिक शोषण के भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ शिक्षक ‘नजराना’ (रिश्वत) देकर कार्यालय में टिके हुए हैं। साथ ही, वे अन्य शिक्षकों के काम कराने के बदले उनसे धन की उगाही कर रहे हैं। इस पूरे खेल में कार्यालय के लिपिक (क्लर्क) कौशल कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

​अनुशासनहीनता और बिचौलियों का बोलबाला

​पत्र में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि शिक्षक राजीव कुमार सिंह का विभाग में इतना प्रभाव है कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अमर्यादित तरीके से बैठते हैं। यह भी दावा किया गया है कि वे एक ‘बिचौलिए’ के रूप में काम करते हैं और उनके कहने पर ही कार्यालय के कई निर्णय लिए जाते हैं, जिससे विभाग के अन्य कर्मचारियों में काफी नाराजगी है।

​जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग

​महासंघ ने अपने पत्र के साथ कुछ तस्वीरें और साक्ष्य भी जिलाधिकारी को सौंपे हैं। मांग की गई है कि इन शिक्षकों को तुरंत उनके मूल विद्यालय भेजा जाए और इस पूरे भ्रष्टाचार के सिंडिकेट की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

नोट: यह खबर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ द्वारा जिलाधिकारी को सौंपी गई लिखित शिकायत पर आधारित है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों या विभाग का पक्ष आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।

रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)

Sachcha Samachar Desk

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