बिहार के मोतिहारी नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में है। इस बार शहर में आयोजित होने वाले ‘डिज्नीलैंड मेले’ के टेंडर को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि टेंडर के नियमों और पैसों में हेरफेर करके नगर निगम के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मोतिहारी के पूर्व पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव ने नगर निगम प्रशासन और टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, मेले की अवधि बढ़ने के बावजूद इस साल टेंडर की राशि को पिछले साल के मुकाबले बेहद कम कर दिया गया है।
टेंडर के आंकड़ों में बड़ा अंतर
पूर्व पार्षद द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2025 का टेंडर: पिछले साल डिज्नीलैंड मेले का टेंडर 30 दिनों के लिए हुआ था, जिससे नगर निगम को 54 लाख रुपये का राजस्व मिला था।
- मौजूदा टेंडर: इस बार मेले की अवधि बढ़ाकर 41 दिन कर दी गई, लेकिन इसका टेंडर मात्र 14 लाख 62 हजार 500 रुपये में ही तय कर दिया गया।
मणि भूषण श्रीवास्तव ने सवाल उठाया है कि जब मेले के दिन बढ़ाए गए, तो सरकारी राजस्व पांच गुना से भी कम कैसे हो गया?
मिलीभगत और ‘सेटिंग’ के आरोप
पूर्व पार्षद का सीधा आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी रणनीति के तहत की गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर निगम के अधिकारियों और बिचौलियों ने आपस में मिलीभगत करके टेंडर को ‘मैनेज’ किया है। आरोप के मुताबिक, अपने पसंदीदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए राजस्व की कीमत पर यह समझौता किया गया।
नोट: फिलहाल इस मामले में नगर निगम के आधिकारिक पक्ष या नगर आयुक्त की तरफ से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। आरोपों की पूरी सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
आम जनता के बीच चर्चा तेज
इस टेंडर को लेकर मोतिहारी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि दिन बढ़ने के बाद भी टेंडर की रकम इतनी कम कैसे हो सकती है। स्थानीय स्तर पर अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है ताकि सच सामने आ सके।
संवाददाता अमरजीत सिंह






