बिहार में जारी भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच मोतिहारी जिले से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां सरकारी फाइलों में ‘हर घर नल का जल’ पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं।
मामला मोतिहारी जिले के पताही प्रखंड अंतर्गत सरैया गोपाल पंचायत के महमदी गांव (वार्ड नंबर-03) का है। यहां लाखों रुपये की लागत से बनी नल-जल योजना पिछले 5 वर्षों से ठप पड़ी है। इससे नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
5 साल पहले बनी थी टंकी, पर नहीं मिला एक बूंद पानी
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 5 वर्ष पूर्व गांव में पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। कुछ इलाकों में पाइपलाइन बिछाई गई और नल भी लगाए गए, लेकिन काम को अधूरा ही छोड़ दिया गया। नतीजा यह है कि आज तक इस योजना से ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं हुआ।
वर्तमान में बढ़ती गर्मी और भूजल स्तर (वाटर लेवल) नीचे चले जाने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज के चापाकलों और नलकूपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
PHED और प्रशासनिक विभागों पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीण जय मंगल मंडल और कांति देवी ने बताया कि योजना शुरू होने पर उन्हें उम्मीद थी कि पानी की किल्लत दूर होगी, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण ऐसा नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि नवंबर 2024 में इस योजना को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को सौंप दिया गया था। इसके बाद से ग्रामीण पंचायत, प्रखंड और पीएचईडी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।
इस मामले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं:
- जब योजना पीएचईडी को हैंडओवर हो चुकी थी, तो इसे सुचारू रूप से चालू क्यों नहीं किया गया?
- यदि ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया था, तो अधिकारियों ने जांच किए बिना भुगतान कैसे पास कर दिया?
अधिकारी का दावा: शुरू किया जा रहा है काम
मामला बढ़ने और ग्रामीणों के आक्रोश के बाद पीएचईडी के कनीय अभियंता (JE) श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने महमदी गांव पहुंचकर स्थिति की जांच की है। उन्होंने दावा किया कि तकनीशियन को काम पर लगाकर योजना को दोबारा चालू कराया जा रहा है और कुछ घरों में पानी की आपूर्ति शुरू भी हो गई है।
जेई ने आगे बताया कि योजना के रखरखाव और बिजली बिल का भुगतान प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) स्तर से होना है, जिसके लिए उन्हें पत्र भेजा जा रहा है। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
संवाददाता अमरजीत सिंह






