बिहार के मोतिहारी स्थित पिपराकोठी में महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार की ‘अनुसूचित जाति उपयोजना’ और “खेत बचाओ अभियान” के तहत आयोजित हुआ। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में सांसद और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह शामिल हुए।
500 से अधिक किसानों ने लिया भाग
इस कार्यशाला में अनुसूचित जाति के 500 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। राधा मोहन सिंह ने बताया कि यह संस्थान मुख्य रूप से एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) पर काम कर रहा है। इसके तहत किसान एक ही जमीन पर पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन और मछली पालन कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
’खेत बचाओ अभियान’ भविष्य की जरूरत
पूर्व कृषि मंत्री ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारी मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए एक जरूरी कदम है।
’पहले मिट्टी की जांच, फिर खाद का इस्तेमाल’
किसानों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया गया कि खेतों की उपजाऊ क्षमता सिर्फ रासायनिक खादों से नहीं बढ़ती। मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए उसमें जैविक कार्बन, सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों का सही संतुलन होना आवश्यक है।
किसानों को निम्नलिखित उपाय अपनाने की सलाह दी गई:
- गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग बढ़ाएं।
- फसल अवशेषों (पराली आदि) को जलाने के बजाय उसका सही प्रबंधन करें।
- जैव उर्वरकों (Bio-fertilizers) का इस्तेमाल करें।
- खेती में “पहले मृदा परीक्षण, फिर उर्वरक उपयोग” का नियम लागू करें।
कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
इस कार्यशाला में किसानों के अलावा कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। इनमें बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम, हरसिद्धि विधानसभा के विधायक कृष्णनंदन पासवान और किसान नेता मनोज पासवान प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
संवाददाता अमरजीत सिंह






