बिहार 

मोतिहारी: मनरेगा और जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक, डीडीसी ने धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी, दिए सख्त निर्देश

On: June 4, 2026 7:23 AM
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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) | 04 जून 2026 | रिपोर्टर: अमरजीत सिंह

​पूर्वी चंपारण के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) डॉ. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में डॉ. राधा कृष्णन सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। देर शाम तक चली इस बैठक में मनरेगा और जल संसाधन विभाग (WRD) की योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मनरेगा के तहत रोजगार सृजन, पौधारोपण और जल-जीवन-हरियाली अभियान के लक्ष्यों को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।

​रोजगार सृजन में सुस्ती: लक्ष्य से काफी पीछे जिला

​समीक्षा के दौरान जिले में रोजगार सृजन (मानव दिवस सृजन) की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। मई 2026 तक जिले को कुल 23,93,918 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले अब तक केवल 27 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। डीडीसी ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि जिले की प्रगति राज्य के औसत से काफी कम है।

​डीडीसी ने स्थिति में सुधार लाने के लिए सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों (पीओ) को निर्देश दिया कि वे हर पंचायत में प्रतिदिन कम से कम 500 श्रमिकों को अनिवार्य रूप से रोजगार देना सुनिश्चित करें। आंकड़ों के अनुसार, जिले की 199 पंचायतों में मानव दिवस सृजन अभी भी 200 से कम है, जिसे जल्द से जल्द बढ़ाने के लिए कहा गया है।

​मुख्य बिंदु और निर्देश:

  • लेबर डिमांड: जून महीने में वृक्षारोपण की सभी योजनाओं पर शत-प्रतिशत लेबर डिमांड जनरेट करने के निर्देश।
  • ई-केवाईसी (eKYC): मनरेगा श्रमिकों के शत-प्रतिशत ई-केवाईसी कार्य को समय पर पूरा करने की हिदायत।
  • लक्ष्य: हर पंचायत में न्यूनतम 500 मजदूरों को प्रतिदिन काम देना अनिवार्य।

​जल-जीवन-हरियाली: कुछ क्षेत्रों में काम तेज, पईन-पोखरा में सुस्ती

​जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा भी की गई। बैठक में पाया गया कि इस अभियान के कुछ अवयवों में प्रगति हुई है, लेकिन पईन (नहरों) के जीर्णोद्धार, सोखता निर्माण, निजी खेत-पोखरा निर्माण और छतों पर वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के कार्यों की गति काफी धीमी है। डीडीसी ने इन विशिष्ट क्षेत्रों में तेजी लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

​जल संसाधन विभाग की लापरवाही पर सख्ती: 614 में से केवल 44 योजनाओं पर शुरू हुआ काम

​बैठक में मनरेगा और जल संसाधन विभाग के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। विभाग की कुल 614 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अब तक केवल 465 योजनाओं की ही एंट्री सरकारी पोर्टल पर की गई है। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि अब तक मात्र 44 योजनाओं पर ही वास्तविक रूप से कार्य शुरू हो पाया है।

​डीडीसी डॉ. प्रदीप कुमार ने जल संसाधन विभाग के सभी कार्यपालक अभियंताओं को सख्त निर्देश दिया कि सभी स्वीकृत 614 योजनाओं की पोर्टल पर तत्काल एंट्री सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, जिन भी योजनाओं की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन पर तुरंत काम शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं।

​बैठक में शामिल रहे प्रमुख अधिकारी

​इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एनईपी के निदेशक डॉ. कुंदन, मनरेगा के डीपीओ, जल संसाधन विभाग (WRD) और मनरेगा के सभी कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता तथा कनीय अभियंता मुख्य रूप से उपस्थित रहे। डीडीसी ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Sachcha Samachar Desk

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