बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके सम्मानजनक जीवन को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से ‘नालसा जागृति योजना’ के तहत समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) परिसर में चलाया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में उन्हें एक गरिमापूर्ण स्थान दिलाना था।
बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर: अधिकारी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की नींव हैं। उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:
- भरण-पोषण और संरक्षण: वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत बुजुर्गों को मिलने वाले कानूनी अधिकार।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: सरकार द्वारा वृद्धजनों के लिए चलाई जा रही स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएं।
- निःशुल्क विधिक सहायता: कानूनन जो बुजुर्ग वकील का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से मुफ्त कानूनी मदद दी जाती है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे ये मुख्य अधिकारी
इस जागरूकता अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और विधिक सेवा के कई अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने आम जनता और बुजुर्गों से सीधा संवाद किया:
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अधिकारी का नाम |
पद |
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श्री अक्षय कुमार |
सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा |
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सुश्री निधि कुमारी |
एसडीसी एवं विधिक शाखा प्रभारी |
वक्ताओं ने कहा कि अगर किसी भी बुजुर्ग को अपने अधिकारों का उल्लंघन होता दिखे या उन्हें किसी कानूनी सहायता की जरूरत हो, तो वे बिना किसी झिझक के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से संपर्क कर सकते हैं।
भारी संख्या में पहुंचे स्थानीय लोग
कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया, बल्कि बड़ी संख्या में आम जनता और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही था कि युवाओं को बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील बनना होगा ताकि वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें।
संवाददाता अमरजीत सिंह






