बिहार के पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी) जिले में आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पिपराकोठी कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक की अध्यक्षता दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग के सचिव सह पूर्वी चम्पारण के प्रभारी सचिव श्री शीर्षत कपिल अशोक ने की। इस मौके पर जिलाधिकारी श्री सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक श्री स्वर्ण प्रभात भी मौजूद रहे।
प्रभारी सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
बाढ़ से बचाव के इंतजाम: 285 सुरक्षित स्थान चिह्नित और 165 नावें तैयार
संभावित बाढ़ के असर को कम करने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- राहत शिविर और नावें: बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित रखने के लिए जिले में 285 ऊंचे स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहां राहत शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, 165 निजी नाव मालिकों के साथ अनुबंध किया गया है। आपातकालीन स्थिति के लिए 7 मोटरबोट और एसडीआरएफ की 1 टीम को तैनात किया गया है।
- पॉलीथीन शीट्स की उपलब्धता: जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) अब 24 घंटे सातों दिन (24×7) काम कर रहा है। जिले में फिलहाल 20,281 पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं और मुजफ्फरपुर से 5,000 अतिरिक्त शीट्स की मांग की गई है।
- तटबंधों की निगरानी: गंडक, बूढ़ी गंडक और लालबकेया नदी के तटबंधों की मरम्मत का काम मुख्य अभियंता की देखरेख में चल रहा है। प्रशासन द्वारा सभी तटबंधों का संयुक्त निरीक्षण पूरा कर लिया गया है।
कम बारिश या सूखे की स्थिति से निपटने का ‘प्लान बी’
यदि मानसून में देरी होती है या बारिश कम होती है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग ने वैकल्पिक फसलों की योजना बनाई है।
- वैकल्पिक फसलें: कम पानी में उगने वाली फसलों जैसे मक्का, मडुआ, अरहर और धान की विशेष किस्मों का प्रस्ताव तैयार कर कृषि निदेशालय को भेजा गया है।
- बिजली आपूर्ति: सूखे जैसी स्थिति में फसलों और बिचड़ों (नर्सरी) को बचाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- मौसम केंद्र: जिले के सभी प्रखंडों में बारिश मापने वाले यंत्र और ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) पूरी तरह सक्रिय हैं, ताकि मौसम की सटीक जानकारी मिल सके।
स्वास्थ्य, बिजली और अन्य विभागों को सख्त निर्देश
आपदा के समय अन्य आवश्यक सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए प्रभारी सचिव ने संबंधित विभागों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं:
- स्वास्थ्य विभाग: संभावित बीमारियों और महामारियों की रोकथाम के लिए 364 प्रकार की जरूरी दवाओं और मेडिकल सामग्री का स्टॉक तैयार है। सदर अस्पताल में सांप और कुत्ते के काटने की दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
- पशुपालन विभाग: बाढ़ या सूखे के दौरान मवेशियों की सुरक्षा के लिए 45 पशु राहत शिविर स्थल चिह्नित किए गए हैं और मोबाइल वेटरनरी (चलंत पशु चिकित्सा) टीमों का गठन किया गया है।
- बिजली और अग्निशमन विभाग: तेज हवाओं के कारण ढीले तारों से होने वाली आगजनी को रोकने के लिए बिजली विभाग को तुरंत मरम्मत करने को कहा गया है। अग्निशमन विभाग को भीड़भाड़ वाले इलाकों में मॉक ड्रिल करने और अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है।
- वन विभाग: वन्यजीवों के लिए पानी के गड्ढे बनाने और अभ्यारण्यों में पिंजरों को ठंडा रखने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
जागरूकता अभियान और अधिकारियों का प्रशिक्षण
प्रभारी सचिव ने जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और एफएम रेडियो के माध्यम से लोगों को लू, बाढ़, सुखाड़ और आगजनी से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करें। इसके साथ ही, आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सभी अंचलाधिकारियों (CO) को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश भी दिया गया है ताकि राहत कार्य बिना किसी देरी के प्रभावी ढंग से शुरू किए जा सकें।






