मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) | रिपोर्टर: अमरजीत सिंह
अगर आपका कोर्ट में चेक बाउंस से जुड़ा कोई मामला लंबित है, तो आपके पास उसे आपसी सहमति से तुरंत सुलझाने का एक बेहतरीन मौका है। बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में आगामी 18 जुलाई 2026 को एक विशेष लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य चेक बाउंस (138 एन.आई. एक्ट) से जुड़े कानूनी मामलों का आपसी समझौते के आधार पर तुरंत निपटारा करना है।
2066 मामलों की हुई पहचान, भेजे जा रहे हैं नोटिस
इस विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष (जिला विधिक सेवा प्राधिकार) माननीय श्री अभिषेक कुमार दास की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस बैठक में जिले के सभी न्यायिक दंडाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जिले में चेक बाउंस से संबंधित कुल 2066 मामलों को चिन्हित किया गया है। इन सभी मामलों से जुड़े पक्षों को व्यवस्थित तरीके से कानूनी नोटिस भेजे जा रहे हैं, ताकि वे समय पर उपस्थित होकर इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकें।
न्यायालय की अपील: जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दोनों पक्षों को आपसी बातचीत और समझौते के लिए प्रेरित करें। लोक अदालत में होने वाले फैसले से न तो किसी की हार होती है और न ही किसी की जीत, बल्कि दोनों पक्षों के बीच विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
बिना किसी खर्च और मानसिक तनाव के मिलेगा त्वरित न्याय
बैठक में उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री नितिन त्रिपाठी और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री पुनीत कुमार तिवारी ने भी इस आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया। सचिव नितिन त्रिपाठी ने बताया कि लोक अदालत विवादों को सुलझाने का एक बेहद सरल और प्रभावी जरिया है।
उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे इस विशेष लोक अदालत में भाग लेकर अपने लंबित मामलों का शांतिपूर्ण समाधान निकालें। यहाँ कानूनी प्रक्रियाओं के लंबे चक्करों से मुक्ति मिलती है और समय तथा पैसे दोनों की बचत होती है।
क्या होता है एन.आई. एक्ट की धारा 138? (पाठकों के लिए अतिरिक्त संदर्भ)
आम बोलचाल की भाषा में जब कोई व्यक्ति किसी को चेक देता है और वह चेक बैंक में पर्याप्त बैलेंस न होने या किसी अन्य तकनीकी कारण से रिजेक्ट (बाउंस) हो जाता है, तो वह परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत एक कानूनी अपराध माना जाता है। इसके तहत पीड़ित पक्ष अदालत में मुकदमा दायर कर सकता है। ऐसे मामलों में अदालती कार्यवाही लंबी खींच सकती है, जिससे बचने के लिए लोक अदालत सबसे उत्तम विकल्प माना जाता है।






