बिहार 

आत्मनिर्भर भारत: मोतिहारी में प्रधानमंत्री के ‘नेशन फर्स्ट’ संदेश पर पहली विशेष संगोष्ठी आयोजित

On: May 15, 2026 6:46 AM
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मोतिहारी, बिहार। देश को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने के उद्देश्य से बिहार के मोतिहारी में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। भाजपा युवा नेता और उद्योगपति यमुना सीकरीया के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्रहित’ से जुड़े सात मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई। सीकरीया फार्मेसी कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित यह अपनी तरह का देश का पहला कार्यक्रम बताया जा रहा है।

​संयुक्त दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का आगाज़

​कार्यक्रम का शुभारंभ यमुना सीकरीया, मोतिहारी नगर निगम के उपमहापौर डॉ. लालबाबू प्रसाद, भाजपा जिलाध्यक्ष मीना मिश्रा, डॉ. कुमार अजय और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

​विदेशी मुद्रा बचाने के सात सूत्र: ‘नेशन फर्स्ट’ अपील

​यमुना सीकरीया ने प्रधानमंत्री के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की अपील करते हुए कहा कि जिस तरह कोविड के समय पूरा देश जागरूक हुआ था, वैसी ही जागरूकता अब आर्थिक मोर्चे पर जरूरी है। उन्होंने सात प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला जिनसे विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सकता है:

  1. सोने की खरीद में कमी: आने वाले एक वर्ष तक सोने के आयात को कम कर विदेशी पूंजी बचाना।
  2. स्वदेशी का उपयोग: रासायनिक खाद और आयातित खाद्य तेलों के स्थान पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना।
  3. ईंधन की बचत: पेट्रोल और डीजल की खपत कम करना ताकि भविष्य में तेल की कीमतें नियंत्रित रहें।
  4. परिवहन में बदलाव: निजी वाहनों के बजाय रेल मार्ग का अधिक उपयोग और माल ढुलाई के लिए भी रेल का सहारा लेना।
  5. नेचुरल फार्मिंग: विदेशी फर्टिलाइजर के स्थान पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना जिससे स्वास्थ्य और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहें।
  6. विदेशी यात्राओं पर नियंत्रण: वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पर्यटन के लिए विदेशी यात्राओं के बजाय देश के भीतर भ्रमण करना।
  7. भविष्य की तैयारी: किसी भी संभावित वैश्विक संकट या आपदा से निपटने के लिए संसाधनों का उचित संरक्षण करना।

​अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों के विचार

​उपमहापौर डॉ. लालबाबू प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार इन सूत्रों को सरकारी कार्यों में पहले ही लागू कर चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन नियमों के पालन से भारत जल्द ही दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बन सकता है।

​वहीं, डॉ. हीना चंद्रा ने स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कहा कि खाद्य तेल का संतुलित उपयोग न केवल विदेशी मुद्रा बचाएगा, बल्कि जनता को हृदय रोगों से भी दूर रखेगा। पेट्रोलियम संघ के अध्यक्ष सुधांशु जी ने स्पष्ट किया कि ईंधन की बचत से मांग और आपूर्ति का संतुलन बेहतर होगा, जिससे भविष्य में तेल की कीमतें कम हो सकती हैं।

​जन-जागरूकता ही सफलता की कुंजी

​संगोष्ठी में मौजूद वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है, लेकिन भविष्य की आपदाओं के प्रति सतर्क रहना ही समझदारी है। कार्यक्रम का सफल संचालन और समापन उप-प्राचार्या प्रीति दूबे ने किया।

​यह आयोजन स्थानीय स्तर पर राष्ट्रहित की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जो आम जनता को सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास करता है।

संवाददाता अमरजीत सिंह 

Sachcha Samachar Desk

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