मोतिहारी (बिहार): पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल प्रखंड से किसानों की बदहाली की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के 12 गांवों में पिछले आठ महीनों से कृषि बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिसका सीधा असर लगभग 2000 बीघा खेत की सिंचाई पर पड़ रहा है।
दो सीजन की फसलें हुई प्रभावित
बिजली की अनुपलब्धता के कारण किसानों को खरीफ और रबी, दोनों ही सीजन में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय किसानों के अनुसार, धान की फसल के समय पटवन न होने से पैदावार में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है। अब गेहूं, सरसों और आलू जैसी रबी फसलों की बुआई और सिंचाई पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
महंगी सिंचाई का बोझ
बिजली न होने के कारण किसान डीजल पंपों का उपयोग करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि 95 रुपये लीटर डीजल के कारण एक बीघा की सिंचाई में 800 से 1000 रुपये तक का खर्च आ रहा है। यह लागत छोटे किसानों की कमर तोड़ रही है। सिंचाई के अलावा चारा मशीन और थ्रेसर जैसे उपकरण भी बिजली के अभाव में बंद पड़े हैं।
इन 12 गांवों के किसान हैं परेशान
बिजली संकट से प्रभावित गांवों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- शेखपुरावा और पसैनी
- रुबनी बेला और सीसीहनी
- बभन टोली और छपरा बिहारी
- चैता, बोकाने और पताही (पूर्वी व पश्चिमी)
विभाग की लापरवाही: बिल वसूलने में आगे, मरम्मत में पीछे
ग्रामीणों का आरोप है कि वे समय पर बिजली बिल का भुगतान करते हैं और उन पर कोई बकाया नहीं है। इसके बावजूद विभाग मामूली तकनीकी खराबी जैसे जले हुए जंफर या टूटे हुए तारों को ठीक करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। किसानों ने बताया कि उन्होंने एसडीओ से लेकर जेई तक गुहार लगाई, लेकिन आठ महीनों में एक भी अधिकारी मौका मुआयना करने नहीं पहुँचा।
प्रशासन को अल्टीमेटम
किसानों ने अपनी समस्या को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली बहाल नहीं की गई, तो वे पकड़ीदयाल बिजली कार्यालय पर तालाबंदी करेंगे और एसडीओ कार्यालय का घेराव करेंगे।
दूसरी ओर, इस मामले में विभाग के कनीय अभियंता (JE) ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रही हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह (मोतिहारी)






