बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक अपराधी को नाबालिग साबित करने के लिए फर्जी स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) बनाने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर थाना पुलिस ने इस जालसाजी में शामिल दो सरकारी शिक्षकों और एक शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला चिरैया थाना में दर्ज एक पुराने केस (कांड संख्या-126/22) से जुड़ा है। इस मामले के आरोपी भोला कुमार उर्फ भोला साह को सजा से बचाने के लिए उसे कागजों पर नाबालिग दिखाने की साजिश रची गई थी।
आरोपी को कम उम्र का साबित करने के लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज (फर्जी टीसी) तैयार किए गए और उन्हें ‘किशोर न्याय परिषद’ (Juvenile Justice Board) के न्यायालय में पेश किया गया ताकि उसे जुवेनाइल एक्ट का फायदा मिल सके।
अदालत को गुमराह करने की कोशिश नाकाम
न्यायालय को जब इन दस्तावेजों पर शक हुआ, तो किशोर न्याय परिषद के आवेदन पर मोतिहारी के नगर थाना में केस (कांड संख्या-453/26) दर्ज कराया गया। मामला दर्ज होते ही पुलिस ने जांच तेज कर दी।
पुलिस कार्रवाई में ये हुए गिरफ्तार:
- सुबोध कुमार पाठक (सरकारी शिक्षक, निवासी: परेवा)
- भोला कुमार (सरकारी शिक्षक)
- एक सरकारी शिक्षिका (नाम गोपनीय रखा गया है)
बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए शिक्षकों से पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस अब उस पूरे रैकेट की जांच कर रही है जो पैसों के लिए फर्जी स्कूल सर्टिफिकेट और दस्तावेज बनाने का धंधा चलाता है।
नगर थाना पुलिस का बयान: “न्यायालय को गुमराह करने की इस साजिश में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा रहा है। मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है।”
संवाददाता अमरजीत सिंह






