बिहार के मोतिहारी में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण जगहों को विकसित करने की तैयारी चल रही है। जिला प्रशासन ने ऐसे स्थलों की पहचान शुरू कर दी है, जिन्हें संवार कर प्रमुख पर्यटन स्थल बनाया जा सके। इसका मुख्य मकसद जिले की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
डीएम ने किया ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण
इस योजना के तहत, जिलाधिकारी (डीएम) ने कोटवा प्रखंड में स्थित राजा टोडरमल से जुड़े ऐतिहासिक अवशेषों और परिसर का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद पुरानी इमारतों और उनकी बनावट की जांच की गई। शुरुआती आकलन में यह बात सामने आई है कि यहाँ मौजूद कुछ इमारतें 110 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। प्रशासन का मानना है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों में पर्यटन के नजरिए से विकसित होने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
पर्यटन विभाग को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस जगह का एक विस्तृत सर्वे करें। अधिकारियों को कहा गया है कि वे इमारतों की मौजूदा स्थिति, उनके ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की जरूरत और पर्यटन विकास की संभावनाओं पर एक पूरी रिपोर्ट तैयार करें।
सर्वे का काम पूरा होने के बाद यह रिपोर्ट सीधे बिहार पर्यटन विभाग को भेजी जाएगी। पर्यटन विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर इन इमारतों की मरम्मत, रखरखाव और पर्यटन के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने का काम करेगा।
प्रशासन की इस पहल के मुख्य उद्देश्य:
- धरोहरों का संरक्षण: जिले की पुरानी और ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को नष्ट होने से बचाना।
- पर्यटन को बढ़ावा: राज्य और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए इन जगहों को आकर्षक बनाना।
- आर्थिक विकास और रोजगार: पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए व्यापार और रोजगार के नए रास्ते खोलना।
जिला प्रशासन का यह कदम मोतिहारी के स्थानीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में एक व्यावहारिक और महत्वपूर्ण प्रयास है।
संवाददाता अमरजीत सिंह






