बिहार के मोतिहारी शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने और ऐतिहासिक मोतीझील को नया जीवन देने के लिए एक बड़ी योजना पर काम चल रहा है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे योजना’ के तहत शहर में 106 करोड़ रुपये की लागत से चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इस परियोजना के पीछे पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और स्थानीय सांसद राधामोहन सिंह के विशेष प्रयास शामिल हैं।
घरों और नालों का गंदा पानी होगा साफ
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मोतिहारी शहर के घरों और बड़े नालों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदियों या मोतीझील में गिरने से रोकना है। इन प्लांट के जरिए गंदे पानी को आधुनिक तकनीक से साफ (शोधित) किया जाएगा और उसके बाद ही उसे जलस्रोतों में छोड़ा जाएगा। इससे शहर का जल प्रदूषण काफी हद तक कम हो जाएगा।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगे सभी प्लांट
नगर क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में बनाए जा रहे ये चारों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरी तरह अत्याधुनिक होंगे। यह जैविक और रासायनिक तकनीक पर काम करेंगे। पानी को साफ करने के लिए इसमें कई चरण शामिल होंगे:
- स्क्रीनिंग: पानी में तैरते कचरे को अलग करना।
- सेडिमेंटेशन: भारी गंदगी को नीचे बैठाना।
- एरेशन और बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट: जैविक क्रियाओं द्वारा पानी के हानिकारक तत्वों को खत्म करना।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, 2027 के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य
हाल ही में निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से मोतीझील का पानी बिल्कुल साफ और निर्मल हो जाएगा। इससे न सिर्फ जलीय जीवों और वनस्पतियों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि मोतिहारी में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। उन्होंने जानकारी दी कि चारों प्लांट का काम तेज गति से चल रहा है और इसे साल 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त आशीष कुमार, उप महापौर डॉ. लालबाबू प्रसाद, बुडको (BUIDCO) के अधिकारी और कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोग उपस्थित थे।
संवाददाता अमरजीत सिंह






