बिहार के मोतिहारी शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम चल रहा है। शहर के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने और नदियों-झीलों को प्रदूषण से बचाने के लिए चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
हाल ही में मोतिहारी के माननीय विधायक श्री प्रमोद कुमार, नगर निगम की महापौर श्रीमती प्रीति गुप्ता और उप महापौर डॉ. लालबाबू प्रसाद गुप्ता ने बुडको (BUIDCO) के इंजीनियरों के साथ मोतीझील के किनारे चल रहे निर्माण कार्य का जायजा लिया।
क्या है योजना और कैसे काम करेगा STP?
बुडको के अभियंताओं के मुताबिक, मोतीझील और शहर की अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत शहर में चार अलग-अलग स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
इन प्लांट्स का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरों और नालियों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे नदियों या मोतीझील में न गिरे।
आधुनिक तकनीक से साफ होगा पानी
ये सभी STP आधुनिक जैविक और रासायनिक शोधन प्रक्रिया (Biological and Chemical Treatment) पर काम करेंगे। पानी को साफ करने के लिए कई चरणों का पालन किया जाएगा:
- स्क्रीनिंग (Screening): पानी में तैरते कचरे को अलग करना।
- सेडिमेंटेशन (Sedimentation): भारी गंदगी को नीचे बैठाकर साफ करना।
- एरेशन (Aeration): पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाना।
- बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट (Biological Treatment): बैक्टीरिया और आधुनिक तकनीक की मदद से हानिकारक तत्वों को खत्म करना।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह शोधित और साफ पानी को झील या नदियों में छोड़ा जाएगा।
पर्यावरण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरे होने से मोतिहारी शहर को कई बड़े फायदे होंगे:
- स्वच्छ जल: मोतीझील का पानी पूरी तरह साफ और निर्मल हो जाएगा।
- जलीय जीवन की सुरक्षा: पानी साफ होने से झील के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में सुधार होगा, जिससे जलीय जीवों और वनस्पतियों को नया जीवन मिलेगा।
- पर्यटन का विकास: साफ-सुथरी मोतीझील आने वाले समय में पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगी, जिससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
कब तक पूरा होगा काम?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, चारों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य इस समय पूरी गति से चल रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट और तय समय सीमा के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को वर्ष 2027 के अंत तक मुकम्मल कर लिया जाएगा। इसके बाद मोतिहारी को जल प्रदूषण की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
संवाददाता अमरजीत सिंह






