पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिरी है। उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रदीप कुमार ने मनरेगा के तहत मानव दिवस (रोजगार) सृजन में भारी कमी पाए जाने पर सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों (PO) का वेतन बंद करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
जल संसाधन और मनरेगा की संयुक्त बैठक में समीक्षा
मोतिहारी समाहरणालय के डॉ. राधाकृष्णन सभागार में डीडीसी डॉ. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंताओं के साथ-साथ मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी और कनीय अभियंता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य जल संसाधन विभाग और मनरेगा के तालमेल (अभिसरण) से चल रही योजनाओं की प्रगति को जांचना था।
इन मुख्य बिंदुओं पर हुई चर्चा:
- 614 योजनाओं की प्रगति: दोनों विभागों के तालमेल से स्वीकृत की गई 614 योजनाओं पर काम शुरू होने की स्थिति।
- जियो-टैगिंग और एमआर (MR) जनरेशन: चालू योजनाओं की डिजिटल मैपिंग और मस्ट रोल (हाजिरी) जारी करने की समीक्षा।
- रोजगार सृजन: मनरेगा के तहत पंचायत स्तर पर मानव दिवस (काम के दिन) बढ़ाने की स्थिति।
- जल जीवन हरियाली: जल संरक्षण, पौधारोपण, नहर, आहर और पाइन जैसी योजनाओं को ‘जल जीवन हरियाली’ पोर्टल पर दर्ज करना।
- e-KYC और बायोमैट्रिक उपस्थिति: श्रमिकों और कर्मचारियों के वेरिफिकेशन की स्थिति।
नोडल अफसर को योजनाओं की जानकारी तक नहीं
समीक्षा के दौरान प्रशासनिक स्तर पर बड़ी लापरवाही सामने आई। पूर्वी चंपारण के लिए नामित नोडल पदाधिकारी-सह-कार्यपालक अभियंता (तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी) को अपनी ही योजनाओं की बुनियादी जानकारी नहीं थी। वह बैठक में यह बताने में असमर्थ रहे कि कितनी योजनाओं पर काम शुरू हुआ है और कितनों पर मस्ट रोल (MR) निकल रहा है। डीडीसी ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि नोडल अफसर द्वारा योजनाओं की नियमित समीक्षा नहीं की जा रही है।
मात्र 14% काम पर एक्शन, 25 मई तक का अल्टीमेटम
बैठक में पाया गया कि जिले में मनरेगा के तहत लक्ष्य के मुकाबले मात्र 14 प्रतिशत मानव दिवस का ही सृजन हुआ है, जो कि बेहद निराशाजनक है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीडीसी ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- वेतन रोकने के आदेश: काम में ढिलाई बरतने वाले सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों (PO) का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।
- 80% का लक्ष्य: सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 25 मई 2026 तक रोजगार सृजन के इस आंकड़े को बढ़ाकर कम से कम 80 प्रतिशत किया जाए।
- मुख्यालय में रहना अनिवार्य: सभी मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारियों और कर्मियों को अपने निर्धारित प्रखंड मुख्यालय में ही रहने के आदेश दिए गए हैं।
- बायोमैट्रिक हाजिरी: सभी कर्मचारियों को बायोमैट्रिक सिस्टम के माध्यम से ही अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी, जिससे फील्ड में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित हो सके।
संवाददाता अमरजीत सिंह






