मुंगेर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक शिथिलता एक बार फिर छात्रों के लिए मुसीबत बन गई है। ताजा मामला हरि सिंह महाविद्यालय (HS College) का है, जहाँ स्नातक के सौ से अधिक छात्र-छात्राएं अगले सेमेस्टर में नामांकन (Enrollment) नहीं ले पा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण उनका एक कीमती साल बर्बाद होने की कगार पर है।
क्या है पूरा मामला?
स्नातक सत्र 2023-27 और 2024-28 के कई बैकलॉग छात्रों ने सत्र 2025-29 के विद्यार्थियों के साथ सेमेस्टर-1 की परीक्षा दी थी। परीक्षा संपन्न हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय ने अब तक इसका परिणाम घोषित नहीं किया है।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेमेस्टर-3 और सेमेस्टर-5 में नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिजल्ट नहीं आने के कारण छात्र अपना क्रेडिट स्कोर पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे नामांकन के लिए अपात्र हो गए हैं।
क्रेडिट सिस्टम और नामांकन की शर्तें
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, छात्रों को अगले सेमेस्टर में जाने के लिए न्यूनतम क्रेडिट प्राप्त करना अनिवार्य है:
- सेमेस्टर-3 के लिए: सेमेस्टर-1 और 2 को मिलाकर कम से कम 28 क्रेडिट होने चाहिए।
- सेमेस्टर-5 के लिए: सेमेस्टर-1 से 4 तक कुल 68 क्रेडिट और सेमेस्टर-1 व 2 में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
रिजल्ट लंबित होने और पुराने परिणामों में तकनीकी त्रुटियों के कारण छात्र इन शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
छात्रों के आरोप और मांग
छात्रों और छात्र संगठनों (ABVP) का कहना है कि विश्वविद्यालय ने न केवल रिजल्ट में देरी की है, बल्कि जारी किए गए परिणामों में भी कई विसंगतियां हैं। कई छात्रों के मार्कशीट में सेमेस्टर-1 के क्रेडिट गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं।
छात्र नेता शुभम केशरी और आर्यन राज ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय जल्द ही रिजल्ट में सुधार और प्रकाशन नहीं करता है, तो कई छात्र ‘ड्रॉप आउट’ (पढ़ाई छोड़ने) को मजबूर हो जाएंगे।
कॉलेज प्रशासन का पक्ष
इस गंभीर स्थिति पर हरि सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र प्रसाद राम ने बताया कि छात्रों की समस्याओं से विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को अवगत करा दिया गया है। फिलहाल छात्र विश्वविद्यालय के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
अतिरिक्त संदर्भ: मुंगेर विश्वविद्यालय में सत्रों की अनियमितता पहले भी चर्चा का विषय रही है। क्रेडिट सिस्टम आधारित नई शिक्षा नीति के तहत समय पर परिणाम घोषित करना अनिवार्य है, ताकि छात्र बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।











