बिहार के मोतिहारी की पहचान मानी जाने वाली मोतीझील को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। झील की स्वच्छता और इसके पुराने गौरव को वापस लाने के लिए चार अलग-अलग स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।
गंदे पानी पर लगेगी रोक, झील को मिलेगा नया जीवन
अक्सर शहरों का गंदा पानी और नालों का कचरा सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों में गिरकर उन्हें प्रदूषित कर देता है। मोतीझील के साथ भी यही समस्या रही है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य झील में गिरने वाले अनुपचारित सीवेज (गंदे पानी) को रोकना है। इन चार प्लांट्स के चालू होने के बाद, नालों का पानी पहले फिल्टर और साफ किया जाएगा, उसके बाद ही उसे झील में छोड़ा जाएगा।
आधुनिक तकनीक से होगी पानी की सफाई
ये सभी STP आधुनिक जैविक और रासायनिक शोधन प्रक्रिया पर आधारित होंगे। इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
- स्क्रीनिंग: पानी से ठोस कचरा अलग करना।
- सेडिमेंटेशन: भारी अशुद्धियों को नीचे बिठाना।
- एरेशन और बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट: सूक्ष्मजीवों और ऑक्सीजन की मदद से हानिकारक तत्वों को खत्म करना।
इस प्रक्रिया के बाद जो पानी झील में जाएगा, वह पूरी तरह से स्वच्छ और जलीय जीवन के अनुकूल होगा।
पर्यटन और पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के पूरे होने से न केवल झील का जल निर्मल होगा, बल्कि इसके पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में भी सुधार आएगा। जलीय जीव-जंतु और वनस्पतियां फिर से पनप सकेंगी। प्रशासन को उम्मीद है कि साफ-सफाई के बाद मोतीझील एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
2027 तक लक्ष्य और जनता से अपील
प्रशासन के अनुसार, चारों प्लांट्स का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिला प्रशासन का संदेश: झील को साफ रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। प्रशासन ने नागरिकों से विशेष अपील की है कि वे झील में कूड़ा-कचरा या प्लास्टिक न फेंकें और इस महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल में अपना सक्रिय सहयोग दें।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






