मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) | अमरजीत सिंह की विशेष रिपोर्ट
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में भारत की जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। जिले के सभी प्रखंडों और नगर निकायों में इस महाअभियान के पहले चरण के लिए चयनित प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) का प्रशिक्षण सोमवार, 13 अप्रैल 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना की प्रक्रिया
बता दें कि जनगणना 2027 को व्यवस्थित रूप से संपन्न करने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में बांटा गया है।
- पहला चरण: मकानों की सूची तैयार करना और मकानों की गणना (House Listing and House Census)।
- कार्य अवधि: पहले चरण का जमीनी कार्य 02 मई 2026 से शुरू होगा और इसे 31 मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
12,000 से अधिक कर्मी संभालेंगे मोर्चा
इस बार के गणना कार्य को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए जिले में कुल 12,616 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। इन सभी कर्मियों को 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे क्षेत्र में जाकर डेटा संग्रह के दौरान किसी भी तकनीकी या प्रक्रियात्मक त्रुटि से बच सकें।
पूरी तरह डिजिटल और ‘पेपरलेस’ होगी जनगणना
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि यह पूरी तरह से डिजिटल होगी।
”इस बार जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस (कागज रहित) रखी गई है। आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल मोड में किया जाएगा, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी और गलतियों की गुंजाइश कम होगी।”
जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सभी प्रगणक इकाइयों का भौतिक गठन कर लिया गया है। गणना के दौरान कर्मचारी मकानों पर नंबर अंकित करेंगे और परिवार के मुखिया से जानकारी प्राप्त कर आंकड़ों को दर्ज करेंगे।
प्रशासन की कड़ी निगरानी
जिला पदाधिकारी (डीएम) सह प्रधान जनगणना अधिकारी, श्री सौरभ जोरवाल खुद इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे प्रशिक्षण शिविरों का निरंतर निरीक्षण करें।
इसके अलावा, जिला जनगणना कोषांग ने भी तीन विशेष टीमों का गठन किया है जो विभिन्न प्रखंडों में जाकर प्रशिक्षण की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं।
संपादकीय नोट: जनगणना किसी भी राष्ट्र के विकास और योजनाओं के निर्माण के लिए आधारभूत डेटा प्रदान करती है। पूर्वी चंपारण में इसकी तैयारी प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है।






