बिहार 

मोतिहारी: अब किसानों की बनेगी ‘डिजिटल पहचान’, सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए ‘फार्मर आईडी’ अनिवार्य

On: May 14, 2026 12:54 PM
Follow Us:
---Advertisement---

पूर्वी चंपारण (बिहार) के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। भारत सरकार की ‘एग्री स्टैक’ परियोजना के तहत अब जिले के सभी किसानों की अपनी एक विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ (किसान पहचान पत्र) बनाई जाएगी। जिला प्रशासन ने इसे ‘मिशन मोड’ में पूरा करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी योजना का लाभ सीधे और आसानी से किसानों तक पहुंच सके।

​30 जून तक चलेगा विशेष अभियान

​जिलाधिकारी के निर्देश पर उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रदीप कुमार ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस अभियान की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 मई से शुरू हुआ यह विशेष अभियान 30 जून 2026 तक चलाया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी पात्र किसान इस डिजिटल पंजीकरण से वंचित न रहे।

​फार्मर आईडी क्यों है जरूरी?

​यह फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान होगी। भविष्य में कृषि विभाग की सभी लाभकारी योजनाओं, जैसे सब्सिडी, बीज, खाद और अन्य वित्तीय सहायता का लाभ केवल इसी आईडी के आधार पर दिया जाएगा। इसे एक तरह से किसानों का डिजिटल आधार कार्ड माना जा सकता है।

​कैसे बनेगी आपकी फार्मर आईडी?

​इस आईडी को बनाने की प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा गया है:

  1. ई-केवाईसी (e-KYC): सबसे पहले कृषि सलाहकार, समन्वयक या तकनीकी प्रबंधक के माध्यम से किसान का ई-केवाईसी किया जाता है।
  2. जमाबंदी सत्यापन: इसके बाद राजस्व विभाग के कर्मचारी किसान के नाम की जमाबंदी (भूमि रिकॉर्ड) की पुष्टि करते हैं। इन दोनों प्रक्रियाओं के पूरा होते ही फार्मर आईडी जनरेट हो जाती है।

स्वयं भी कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन: किसान भाई कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी फार्मर रजिस्ट्री खुद कर सकते हैं।

​पीएम किसान लाभार्थियों के लिए आसान मौका

​जिले में वर्तमान में लगभग 4.80 लाख किसान पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं, जिनमें से 1.62 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिन किसानों के नाम पर जमाबंदी उपलब्ध है, वे शिविरों में जाकर आसानी से आईडी बनवा सकते हैं। जिनके रिकॉर्ड में कोई समस्या है, वे ‘परिमार्जन’ के जरिए सुधार करवाकर इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

​लापरवाही पर अधिकारियों पर गाज

​समीक्षा बैठक के दौरान डीडीसी ने कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। संतोषजनक प्रगति न होने के कारण घोड़ासहन, मधुबन, तेतरिया और पिपराकोठी के प्रखंड कृषि अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और अगले आदेश तक उनका वेतन रोक दिया गया है।

​सभी किसान सलाहकारों को निर्देश दिया गया है कि वे हर पंचायत में प्रतिदिन कम से कम 10 किसानों की फार्मर आईडी बनवाना सुनिश्चित करें।

पाठकों के लिए सुझाव: यदि आप एक किसान हैं, तो समय सीमा समाप्त होने का इंतजार न करें। अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी डिजिटल आईडी जल्द से जल्द बनवा लें।

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment