मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), पूर्वी चंपारण द्वारा 17 मई 2026 को मोतिहारी केंद्रीय कारागार (जेल) में एक विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएं योजना’ के तहत आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य जेल में बंद ऐसे कैदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना था जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं या समाज के वंचित वर्ग से आते हैं।
समाज के अंतिम पायदान तक न्याय पहुँचाना हमारा उद्देश्य: सचिव नितिन त्रिपाठी
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी संस्थाओं का काम सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय सुनिश्चित करना है।
उन्होंने विशेष रूप से मानसिक रूप से अस्वस्थ और दिव्यांग कैदियों के प्रति संवेदनशीलता बरतने पर जोर दिया। सचिव ने कहा कि ऐसे बंदियों को केवल कानूनी मदद की ही नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार, सही परामर्श और पुनर्वास (समाज में दोबारा सम्मान से जीने) की जरूरत होती है।
कैदियों की मदद के लिए ‘ई-मुलाकाती विधिक सहायता हेल्प डेस्क’ शुरू
इस अवसर पर सचिव नितिन त्रिपाठी द्वारा जेल परिसर में ‘ई-मुलाकाती विधिक सहायता हेल्प डेस्क’ का उद्घाटन किया गया।
- यह हेल्प डेस्क बंदियों और उनके परिजनों को केस से जुड़ी जानकारी देने में मदद करेगा।
- इसके माध्यम से कैदी मुफ्त कानूनी सहायता और आवेदन से जुड़ी प्रक्रियाएं आसानी से पूरी कर सकेंगे।
- इसे कैदियों के लिए न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मानसिक रोगी वार्ड का भी हुआ उद्घाटन
जेल के भीतर मानसिक रूप से अस्वस्थ कैदियों के बेहतर इलाज और देखभाल के लिए एक अलग ‘मानसिक रोगी वार्ड’ की शुरुआत की गई। सचिव ने बताया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों को एक सुरक्षित और संवेदनशील माहौल देना बेहद जरूरी है ताकि उनका सही तरीके से इलाज हो सके।
बच्चों और बंदियों के बीच खेल सामग्री का वितरण
जेल में बंद पुरुष और महिला कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और सुधारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए खेल सामग्री का वितरण किया गया। इसके साथ ही, जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे छोटे बच्चों को भी खेल के सामान दिए गए। इसका उद्देश्य बच्चों को जेल के माहौल से दूर एक सकारात्मक और विकासशील वातावरण प्रदान करना है। प्राधिकार ने स्पष्ट किया कि वे जेल में रह रहे बच्चों के अधिकारों और उनके मानसिक व शारीरिक विकास के प्रति पूरी तरह गंभीर हैं।
कानून और अधिकारों की दी गई विस्तृत जानकारी
इस जागरूकता शिविर में ‘लॉ फाउंडेशन’ से आए विशेषज्ञों ने बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, मुफ्त कानूनी सहायता पाने के तरीके, बंदियों के संवैधानिक अधिकार और सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम के दौरान कैदियों की व्यक्तिगत समस्याओं को सुना गया और उन्हें मौके पर ही जरूरी कानूनी सलाह दी गई।
जेल अधीक्षक विजय अरोड़ा ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बंदियों में आत्मविश्वास जागता है और उनके व्यवहार में सकारात्मक सुधार आता है। कार्यक्रम में जेल प्रशासन के अधिकारी, पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs) और बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।
संवाददाता अमरजीत सिंह






