बिहार के दूसरे सबसे बड़े जिले पूर्वी चंपारण में कानून-व्यवस्था को बेहतर करने और अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव किया गया है। जिले में ‘ग्रामीण एसपी’ (SP Rural) का नया पद बनने के बाद अब काम और थानों का बंटवारा भी तय कर दिया गया है।
डीआईजी हर किशोर राय के अनुसार, अनुमंडलों और थानों के इस नए विभाजन के प्रस्ताव को मंजूरी देकर मुख्यालय भेज दिया गया है। इस नई व्यवस्था से जिले में प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा और अपराधियों पर नकेल कसना आसान होगा।
मोतिहारी एसपी और ग्रामीण एसपी के बीच कार्यक्षेत्र का बंटवारा
काम के दबाव को कम करने और मामलों की जांच तेजी से पूरी करने के लिए जिले को दो हिस्सों में बांटा गया है:
- मोतिहारी एसपी का कार्यक्षेत्र: इनके अधीन सदर अनुमंडल और चकिया अनुमंडल के क्षेत्र रहेंगे।
- ग्रामीण एसपी का कार्यक्षेत्र: इनके अधीन जिले के बाकी सभी अनुमंडल और उनसे जुड़े थाने आएंगे।
नेपाल सीमा के कारण फैसला महत्वपूर्ण
पूर्वी चंपारण की सीमा नेपाल से सटी होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाका है। वर्तमान में इस सीमाई क्षेत्र में एसएसबी (SSB) के करीब 18 बॉर्डर आउटपोस्ट और 12 छोटे-बड़े थाने काम कर रहे हैं। ग्रामीण एसपी की तैनाती से अब इन सीमावर्ती इलाकों में गश्त और निगरानी व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत हो सकेगी।
लंबे समय से हो रही थी मांग
जिले की बड़ी आबादी और थानों के बढ़ते बोझ को देखते हुए काफी समय से यहां ग्रामीण एसपी की मांग की जा रही थी। इसके लिए भाजपा विधायक सचिंद्र सिंह ने विधानसभा में आवाज उठाई थी। सरकार के इस फैसले का स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया है।
इस नई व्यवस्था से आम जनता को क्या फायदे होंगे?
- त्वरित कार्रवाई: ग्रामीण इलाकों में पुलिस अब पहले से ज्यादा तेजी से पहुंच सकेगी।
- बेहतर निगरानी: सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी और अवांछित गतिविधियों पर रोक लगेगी।
- मजबूत मॉनिटरिंग: थानों के कामकाज पर वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी।
- संतुलित कार्यभार: पुलिस अधिकारियों पर काम का बोझ कम होने से मामलों का निपटारा जल्दी होगा।
संवाददाता अमरजीत सिंह






