पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के ढाका और पचपकड़ी क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) ने कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया।
इन अस्पतालों और क्लीनिकों की हुई जांच
सिकरहना के अनुमंडल पदाधिकारी श्री विजय कुमार ने अपनी टीम के साथ ढाका और पचपकड़ी थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले निम्नलिखित केंद्रों की बारीकी से जांच की:
- अपना हॉस्पिटल, ढाका
- सचदेवा ऑर्थो एंड फिजियो थेरेपी क्लीनिक, ढाका
- आयुष एवं पीयूष स्वास्थ्य केंद्र, पचपकड़ी
- पचपकड़ी इमरजेंसी केंद्र
जांच के दौरान क्या-क्या परखा गया?
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पतालों के संचालन से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेजों की मांग की। मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच केंद्रित रही:
- पंजीयन (Registration): क्या अस्पताल के पास संचालन का वैध लाइसेंस है?
- डॉक्टरों की योग्यता: अस्पताल में तैनात डॉक्टरों के डिग्री और उनके प्रमाण पत्रों का सत्यापन।
- अग्निशमन सुरक्षा (Fire Safety): आग से बचाव के लिए एनओसी (NOC) और जरूरी उपकरण।
- बायो-वेस्ट निस्तारण: अस्पताल से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन का सर्टिफिकेट।
कमी पाए जाने पर होगी कानूनी कार्रवाई
अनुमंडल पदाधिकारी ने अस्पताल संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सभी आवश्यक और वैध कागजात जल्द से जल्द प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन केंद्रों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिलेंगे या जो नियमों की अनदेखी करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील किया जा सकता है।
जांच टीम में शामिल अधिकारी
इस औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें अनुमंडलीय अस्पताल सिकरहना के उपाधीक्षक, ढाका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मुख्य थे।
अतिरिक्त संदर्भ: बिहार स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निबंधित होना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है।






