बिहार 

मोतिहारी: राष्ट्रीय लोक अदालत में 30 साल पुराने मामलों का निपटारा, करोड़ों के बैंक बकाये पर हुआ समझौता

On: March 14, 2026 7:56 PM
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मोतिहारी, पूर्वी चंपारण बिहार के मोतिहारी में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री राजेश कुमार वर्मा ने किया। इस लोक अदालत में न केवल आपसी विवाद सुलझाए गए, बल्कि दशकों पुराने कानूनी मामलों का भी अंत हुआ।

​आपसी सहमति से विवादों का अंत: न किसी की जीत, न किसी की हार

​उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि समाज में विवाद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका समाधान आपसी सूझ-बूझ से करना ही बुद्धिमानी है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत को विवाद सुलझाने का एक सशक्त और सरल माध्यम बताया।

​वहीं, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक कुमार दास ने एक महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने कहा:

​”लोक अदालत के जरिए सुलझने वाले मामलों में किसी की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष सम्मान के साथ समझौते के जरिए अपने विवाद खत्म करते हैं।”

 

​आंकड़ों में सफलता: करोड़ों का समझौता और पुराने केस खत्म

​इस बार लोक अदालत की सफलता को आंकड़ों के जरिए भी देखा जा सकता है। जिले भर में कुल 27 बेंच (सदर मोतिहारी में 22, अरेराज में 1 और ढाका में 4) का गठन किया गया था।

  • पुराने मामलों का निपटारा: अरेराज कोर्ट में 30 साल पुराने मुकदमों का भी आपसी सहमति से समाधान किया गया।
  • बैंक मामले: बैंक से जुड़े लगभग 2000 मामलों में समझौता हुआ, जिसके तहत करीब 7 करोड़ रुपये की राशि पर सहमति बनी।
  • न्यायालयी वाद: विभिन्न न्यायालयों में लंबित 1000 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।
  • राजस्व वसूली: माप-तौल विभाग द्वारा लगभग 92,000 रुपये की वसूली की गई।

​सामाजिक सरोकार: सहायता और सम्मान

​लोक अदालत केवल कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सामाजिक कल्याण की झलक भी दिखी:

  1. महिला सशक्तिकरण: समाज में विशेष योगदान देने वाली 7 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
  2. आर्थिक सहायता: अनुसूचित जाति कल्याण योजना के तहत 5 लाभार्थियों को ‘विक्टिम कम्पनसेशन’ के चेक दिए गए।
  3. दिव्यांग सहायता: 5 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई ताकि उनका जीवन सुगम हो सके।

​क्या है लोक अदालत का महत्व?

​जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री नितिन त्रिपाठी ने बताया कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था का एक मानवीय चेहरा है। इसका मुख्य उद्देश्य सस्ता, त्वरित और सुलभ न्याय दिलाना है। इससे न केवल अदालतों पर बोझ कम होता है, बल्कि आम जनता का पैसा और समय भी बचता है।

कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति: इस अवसर पर जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इसरार अहमद सहित भारी संख्या में न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन एसीजेएम श्रीमती श्वेता सिंह ने किया।

रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी।

संपादन: कंटेंट टीम, सच्चा समाचार।

Sachcha Samachar Desk

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