बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से समाज को जागरूक करने वाली एक सकारात्मक खबर सामने आई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर छौड़ादानो स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन’ (लैंगिक समानता) और ‘बाल विवाह उन्मूलन’ को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करना था।
बाल विवाह के खिलाफ कानूनी अधिकारों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान स्कूल की छात्राओं को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और इससे जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया गया। जेंडर विशेषज्ञों ने बालिकाओं को समझाया कि समाज में लड़का और लड़की दोनों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
छात्राओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं। बेटियों को खुद के पैरों पर खड़े होने और अपने फैसले खुद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
वित्तीय साक्षरता और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा
इस मौके पर मौजूद वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ ने छात्राओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने के तरीके सिखाए। उन्हें बताया गया कि सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए पैसों का सही प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी होना कितना जरूरी है। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
महिला एवं बाल विकास निगम का उद्देश्य:
इस तरह के अभियानों का मुख्य लक्ष्य बेटियों के भीतर आत्मविश्वास जगाना है, ताकि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खुद आवाज उठा सकें।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हुआ पौधरोपण
जागरूकता सत्र के बाद विद्यालय परिसर में पौधरोपण (वृक्षारोपण) कार्यक्रम भी चलाया गया। शिक्षकों, अधिकारियों और छात्राओं ने मिलकर पौधे लगाए और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्कूल के शिक्षक, शिक्षा विभाग के कर्मी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)






