मोतिहारी। शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने और लोगों को जाम के झंझट से बचाने के लिए नगर निगम ने लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। शहर के आठ प्रमुख चौराहों पर लगाए गए स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल आज देखरेख के अभाव में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। कहीं बत्तियां खराब हैं, तो कहीं लोग नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं।
एक करोड़ का निवेश, पर जमीनी हकीकत शून्य
नगर निगम ने शहर के कचहरी चौक, छतौनी, जानपुल और हॉस्पिटल चौक समेत आठ मुख्य स्थानों पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगवाए थे। प्रशासन का दावा था कि इससे शहर की सूरत बदलेगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
मगर आज स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। रखरखाव की कमी और प्रशासन की उदासीनता के कारण अधिकांश सिग्नल केवल खंभों पर लटके डिब्बे बनकर रह गए हैं।
इन प्रमुख चौराहों पर सिस्टम फेल
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल हॉस्पिटल चौक, मीना बाजार और गायत्री मंदिर चौक पर सिग्नल पूरी तरह बंद पड़े हैं। सिग्नल बंद होने से यहां वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे पैदल चलने वालों का सड़क पार करना दूभर हो गया है।
- कचहरी चौक: यह जिला मुख्यालय और एसपी ऑफिस के पास होने के कारण बेहद संवेदनशील है। यहां पुलिस की मौजूदगी में कुछ हद तक नियमों का पालन होता है, लेकिन तकनीकी खराबी यहां भी अक्सर आड़े आती है।
- जानपुल और छतौनी चौक: यहां सिग्नल चालू तो हैं, लेकिन वाहन चालक रेड लाइट की परवाह किए बिना अपनी जान जोखिम में डालकर आगे निकल जाते हैं।
सीसीटीवी और ई-चालान की कमी से बेखौफ चालक
ट्रैफिक सिग्नल के प्रभावी न होने का सबसे बड़ा कारण सीसीटीवी कैमरों का न होना है। चालकों के मन में कार्रवाई या जुर्माने का कोई डर नहीं है।
”जब तक ई-चालान की व्यवस्था शुरू नहीं होगी और कैमरों से निगरानी नहीं रखी जाएगी, तब तक लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे। करोड़ों का निवेश तभी सफल होगा जब सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक हो।” — कौशल किशोर प्रसाद, स्थानीय नागरिक
सिग्नल जंप करने की इस होड़ में सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जो नियम मानकर रुकते हैं, क्योंकि पीछे से आने वाले वाहन उन्हें टक्कर मार सकते हैं।
बढ़ रहा है सड़क हादसों का खतरा
जानकारों का मानना है कि सिग्नलों की यह अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रही है। गायत्री मंदिर और मीना बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदल यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। अनियंत्रित ट्रैफिक के कारण यहां आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है।
निष्कर्ष: सुधार की दरकार
मोतिहारी की जनता को बेहतर यातायात सुविधा देने के लिए केवल सिग्नल लगाना काफी नहीं है। प्रशासन को निम्नलिखित कदम उठाने की जरूरत है:
- खराब पड़े सिग्नलों की तत्काल मरम्मत।
- सभी चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की स्थापना।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ई-चालान के जरिए सख्त कार्रवाई।
- यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता अभियान।
फिलहाल, प्रशासन की चुप्पी और व्यवस्था की बदहाली ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह ‘स्मार्ट’ प्रोजेक्ट पूरी तरह विफल हो जाएगा।







