बिहार 

मोतिहारी: आवास योजना में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, एक कर्मचारी बर्खास्त और तीन पर लगा जुर्माना

On: March 29, 2026 8:38 AM
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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): बिहार के मोतिहारी जिले के पकड़ीदयाल प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बड़ी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक कार्यपालक सहायक की सेवा समाप्त कर दी है, जबकि तीन अन्य आवास सहायकों के वेतन में भारी कटौती का आदेश जारी किया है।

​कैसे खुला भ्रष्टाचार का खेल?

​इस पूरे मामले की शुरुआत पकड़ीदयाल प्रखंड प्रमुख श्रीमती पिंकी देवी की शिकायत से हुई। उन्होंने आवास योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन (DRDA) के निदेशक ने विस्तृत जांच की। जांच के दौरान ऑडियो और वीडियो साक्ष्य पाए गए, जिससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।

​दोषी कर्मियों पर की गई कड़ी कार्रवाई

​जांच रिपोर्ट और सुनवाई के बाद प्रशासन ने निम्नलिखित दंड निर्धारित किए हैं:

​1. विनय कुमार (कार्यपालक सहायक) – अनुबंध रद्द

​कार्यपालक सहायक विनय कुमार पर सबसे गाज गिरी है। उन पर फील्ड में जाकर अवैध रूप से ‘जियो टैगिंग’ करने और लाभार्थियों से पैसे वसूलने का आरोप सही पाया गया। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। परिणामस्वरूप, उनकी संविदा (Contract) को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।

​2. रवि शंकर कुमार (ग्रामीण आवास सहायक) – 15% वेतन कटौती

​सुन्दरपट्टी और चोरमा पंचायत के आवास सहायक रवि शंकर कुमार पर आरोप था कि उन्होंने पक्के मकान वाले लोगों को भी योजना का लाभ दिया। साथ ही, उन्होंने अपनी मिलीभगत से कार्यपालक सहायक को गलत तरीके से जियो टैगिंग करने दी। दंड स्वरूप अगले दो वर्षों तक उनके मूल मानदेय में 15 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

​3. असरारूल हक (ग्रामीण आवास सहायक) – 15% वेतन कटौती

​राजेपुर नवादा पंचायत के आवास सहायक असरारूल हक को अयोग्य लाभार्थियों को आवास योजना का लाभ दिलाने और गलत तरीके से रिपोर्टिंग करने का दोषी पाया गया। इनके विरुद्ध भी दो साल के लिए 15 प्रतिशत मानदेय कटौती का आदेश दिया गया है।

​4. मो. राशिद कुमार (आवास पर्यवेक्षक) – 10% वेतन कटौती

​ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक मो. राशिद कुमार पर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप है। यदि उन्होंने समय पर निरीक्षण किया होता, तो इतनी बड़ी अनियमितता नहीं होती। इस कोताही के लिए उनके मानदेय में अगले दो साल तक 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

​क्या थी प्रमुख अनियमितताएं?

​जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

    • गलत जियो टैगिंग: दूसरे के घर को दिखाकर लाभार्थियों के खाते में दो-दो किस्तों का भुगतान कर दिया गया।
    • पक्के मकान वालों को लाभ: जिन लोगों के पास पहले से पक्का मकान था, उन्हें भी इस योजना की सूची में शामिल किया गया।
    • अवैध वसूली: वार्ड सदस्यों के प्रतिनिधियों और ब्लॉक के कर्मचारियों द्वारा गरीब लाभार्थियों से पैसे ऐंठने के प्रमाण मिले।

विशेष नोट: प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के अन्य प्रखंडों में भी हड़कंप मच गया है। यह स्पष्ट संदेश है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Sachcha Samachar Desk

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