मोतिहारी के हरसिद्धि थाने में तैनात एक महिला सब-इंस्पेक्टर पर कानून की गाज गिरी है। पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात ने कर्तव्यों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी करने के मामले में महिला सब-इंस्पेक्टर अंजलि कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
खबर के अनुसार, यह मामला एक युवती की बरामदगी से जुड़ा है। आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर अंजलि कुमारी ने इस संवेदनशील मामले की जांच में न केवल ढिलाई बरती, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर काम किया। प्रशिक्षु डीएसपी ऋषभ कुमार द्वारा की गई जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर एसपी ने सख्त कदम उठाया।
निलंबन के तीन मुख्य कारण:
- रिश्वत का आरोप: जांच के दौरान यह बात सामने आई कि सब-इंस्पेक्टर ने पीड़ित परिवार से पैसों की मांग की थी और पैसे लेने की पुष्टि भी हुई है।
- नियमों का उल्लंघन: कानून के अनुसार, बरामद की गई युवती को सुरक्षित रूप से ‘बालिका गृह’ भेजा जाना चाहिए था। लेकिन सब-इंस्पेक्टर ने उसे चार दिनों तक थाने में ही रखा, जो नियमों के खिलाफ है।
- जांच में सुस्ती: मामले की संवेदनशीलता को जानते हुए भी पीड़िता के बयान दर्ज करने में काफी देरी की गई, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई।
विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई
एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि अंजलि कुमारी के खिलाफ अब विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी शुरू कर दी गई है।
आम जनता के लिए संदेश
यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है या जनता को परेशान करता है, तो उसके खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सख्त एक्शन लिया जाएगा। मोतिहारी एसपी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






