बिहार के मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। हालांकि गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन प्रखंड के दर्जनों गांवों से अब तक बाढ़ का पानी नहीं निकला है। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है।
नाव और पानी के बीच से आवागमन को मजबूर लोग
बरियारपुर की सभी पंचायतों के गांवों में जलजमाव की स्थिति बरकरार है। संपर्क मार्ग डूबने के कारण लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए नाव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जहां नाव उपलब्ध नहीं है, वहां ग्रामीण मजबूरी में पानी के बीच से पैदल ही आवाजाही कर रहे हैं।
कृष्णानगर समेत कई इलाकों में स्थिति भयावह
राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) 333 के किनारे स्थित कृष्णानगर गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। इस गांव के हर घर में गंगा का पानी घुस चुका है।
इसके अलावा जिन अन्य प्रमुख इलाकों में जलभराव की समस्या है, वे इस प्रकार हैं:
- बरियारपुर दक्षिणी पंचायत: गांधीपुर गांव और वार्ड नंबर 1 में बाढ़ का पानी जमा है। वार्ड 4 और वार्ड 6 से लेकर 12 तक के लोगों को पानी के बीच से ही आना-जाना पड़ रहा है।
- गणेशपुर मुसहरी: इस गांव में भी भारी जलजमाव है।
- अन्य प्रभावित पंचायतें: पडिया, नीरपुर, करहरिया (पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी) पंचायतों के अधिकतर गांवों में अब भी पानी भरा हुआ है।
राहत शिविर बंद होने से भोजन का संकट
एक तरफ लोग जलभराव से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ कई जगहों पर राहत शिविर भी बंद कर दिए गए हैं। घोरघट, झरकहवा और गांधीपुर सहित विभिन्न स्थानों पर लगाए गए कैंप अब संचालित नहीं हो रहे हैं। राहत शिविर बंद होने से दर्जनों गांवों के बाढ़ पीड़ितों को अब पका हुआ भोजन मिलना भी बंद हो गया है, जिससे उनके सामने खाने-पीने का बड़ा संकट पैदा हो गया है।








