मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के निर्देश पर चिरैया प्रखंड क्षेत्र में विशेष धावा दल (रेड टीम) ने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अचानक छापेमारी की। इस सघन जाँच अभियान के दौरान अलग-अलग दुकानों और फैक्ट्रियों से कुल 4 बाल श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है।
इन 4 प्रतिष्ठानों पर मारा गया छापा
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO) के नेतृत्व में टीम ने चिरैया प्रखंड के प्रमुख चौराहों पर चल रहे प्रतिष्ठानों की जाँच की। कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित जगहों से एक-एक बाल श्रमिक को रेस्क्यू किया गया:
- साधु होटल (शांति चौक, चिरैया)
- बाबा ग्लास (शांति चौक, चिरैया)
- सनाया बैग फैक्ट्री (दीपही चौक, चिरैया)
- हाईलाइट बैग फैक्ट्री (दीपही चौक, चिरैया)
नियोजकों पर कानूनी शिकंजा, बच्चे भेजे गए बाल गृह
श्रम अधीक्षक रमाकांत ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चों से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम कराना पूरी तरह से गैरकानूनी है। कानून का उल्लंघन करने वाले इन चारों नियोजकों (मालिकों) के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वहीं, दूसरी ओर मुक्त कराए गए सभी चारों बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC), पूर्वी चंपारण के समक्ष पेश किया गया। समिति के आदेशानुसार बच्चों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए उन्हें फिलहाल बाल गृह भेज दिया गया है।
कड़े कानून का प्रावधान: जेल और भारी जुर्माना
श्रम अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत सख्त सजा के प्रावधान हैं। बच्चों का बचपन छीनने वाले और उनसे मजदूरी कराने वाले लोगों को कड़ा सबक सिखाया जाएगा:
- कानूनी सजा: बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 2 वर्षों तक का कारावास (जेल) हो सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में, पकड़े गए सभी दुकान और फैक्ट्री मालिकों से प्रति बच्चे 20,000 रुपये की दर से अलग से वसूली भी की जाएगी।
संयुक्त टीम में शामिल थे कई विभागों के अधिकारी
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं ने संयुक्त रूप से काम किया। इस विशेष धावा दल में चिरैया, सुगौली, कल्याणपुर, केसरिया और पिपराकोठी के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी शामिल थे।
इनके अलावा डंकन हॉस्पिटल रक्सौल, ग्राम नियोजन केंद्र और ‘प्रयास’ संस्था के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लाइन के 7 जवान और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की टीम ने भी इस कार्रवाई में मुख्य भूमिका निभाई।
श्रम अधीक्षक रमाकांत ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि पूर्वी चंपारण जिले में बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान थमेगा नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में और भी तेजी से लगातार जारी रहेगा।
रिपोर्टर: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






