बिहार 

मनरेगा कार्यों में लापरवाही पर बड़ा एक्शन: पूर्वी चंपारण में अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन रोका, स्पष्टीकरण तलब

On: May 22, 2026 6:56 AM
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मोतिहारी। पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और जल संसाधन विभाग की योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और तकनीकी टीम पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में रोजगार सृजन (मानव दिवस) की बेहद खराब स्थिति को देखते हुए उप विकास आयुक्त (DDC) ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने जिम्मेदार कार्यक्रम पदाधिकारियों (PO), कनीय अभियंताओं और तकनीकी सहायकों का वेतन और मानदेय अगले आदेश तक रोक दिया है।

​राज्य में सबसे निचले पायदान पर पूर्वी चंपारण: समीक्षा बैठक में खुलासा

​मोतिहारी के डॉ. राधाकृष्णन भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त ने जल संसाधन विभाग और मनरेगा के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से चल रही योजनाओं की प्रगति की जांच की। इस दौरान ब्लॉक और पंचायत वार मानव दिवस (रोजगार सृजन) के आंकड़े बेहद निराशाजनक पाए गए। समीक्षा में सामने आया कि रोजगार देने के मामले में पूर्वी चंपारण जिला पूरे बिहार राज्य में सबसे अंतिम पायदान पर पहुंच गया है।

​काम में लापरवाही बरतने वाले पंचायत रोजगार सेवकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उनके नाम प्रतिवेदित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को साफ चेतावनी दी गई है कि जब तक काम में अपेक्षित सुधार नहीं होगा, तब तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा।

​पंचायतों में रोजगार सृजन की जमीनी स्थिति

​बैठक में रखे गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले की अधिकांश पंचायतों में मनरेगा के तहत मिलने वाला रोजगार तय मानकों से काफी कम रहा:

  • 197 पंचायतें: यहाँ मानव दिवस सृजन 50 से भी कम रहा, जिसे अत्यंत निराशाजनक माना गया है।
  • 116 पंचायतें: इन पंचायतों में रोजगार सृजन 50 से 100 के बीच रहा।
  • केवल 81 पंचायतें: सिर्फ इन पंचायतों में ही मानव दिवस सृजन 100 से अधिक हो पाया है।

​25 मई तक मिला अल्टीमेटम: 80% लक्ष्य हासिल करना अनिवार्य

​उप विकास आयुक्त ने जिला औसत से कम प्रदर्शन करने वाले सभी प्रखंडों के कार्यक्रम पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि आगामी 25 मई, 2026 तक हर हाल में निर्धारित लक्ष्य का कम से कम 80 प्रतिशत हासिल किया जाए। ऐसा न होने पर आगे और भी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

​पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को मिलेगा 90 दिनों का रोजगार

​ग्रामीणों को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के सभी लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से मनरेगा से जोड़ा जाएगा। इसके तहत उन्हें 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही सभी मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) शत-प्रतिशत पूरा करने और अधूरी योजनाओं को जल्द से जल्द बंद करने या पूर्ण करने का आदेश दिया गया है।

​जल संसाधन विभाग की 614 योजनाओं को शुरू करने का निर्देश

​जल संसाधन और मनरेगा के तालमेल से जिले में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए नई गाइडलाइन तय की गई है:

  1. जियो-टैगिंग और ऑनलाइन एंट्री: कनीय अभियंता (JE) के माध्यम से सभी योजनाओं की शत-प्रतिशत ऑनलाइन एंट्री कराई जाएगी। इसके बाद पंचायत रोजगार सेवक के जरिए जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) कराकर ही काम शुरू होगा।
  2. मास्टर रोल (MR) जारी करने की प्रक्रिया: जिन योजनाओं की जियो-टैगिंग हो चुकी है, उनका तुरंत मास्टर रोल (MR) निकालकर संबंधित कनीय अभियंता को सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि काम में देरी न हो।
  3. 614 योजनाओं पर फोकस: प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त सभी 614 योजनाओं को 25 मई, 2026 तक हर हाल में शुरू करने की समयसीमा तय की गई है। वर्तमान में 294 योजनाओं की एंट्री कर उन्हें जियो-टैगिंग की प्रक्रिया में भेजा जा चुका है।

​चूंकि यह पूरा प्रोजेक्ट सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसकी लगातार राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है, इसलिए प्रशासन ने कनीय अभियंताओं को अपने-अपने ब्लॉक के कार्यक्रम पदाधिकारियों से बेहतर समन्वय बनाकर काम करने को कहा है।

रिपोर्टर: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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