बिहार 

मोतिहारी: कस्तूरबा बालिका विद्यालय में ‘सखी वार्ता’ का आयोजन, छात्राओं को कानून और सरकारी योजनाओं के प्रति किया गया जागरूक

On: May 16, 2026 8:17 AM
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पूर्वी चम्पारण (केसरिया)। बिहार सरकार के महिला एवं बाल विकास निगम के निर्देश पर ‘मिशन शक्ति’ के तहत केसरिया प्रखंड के कस्तूरबा बालिका विद्यालय में शुक्रवार को ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘सखी वार्ता सह जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं और स्थानीय लोगों को महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा कानूनों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।

​हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी

​कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्राओं को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की विस्तृत जानकारी दी, ताकि वे जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें:

  • महिला हेल्पलाइन: 181
  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
  • राष्ट्रीय साइबर क्राइम शिकायत: 1930

​इसके अलावा, जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ विमेन कार्यालय से मिलने वाली सुविधाओं और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बारे में भी बताया गया।

​बाल विवाह कानून और सजा के प्रावधानों पर चर्चा

​जागरूकता कार्यक्रम के दौरान ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006’ पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि देश में विवाह के लिए कानूनी उम्र लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है।

​बाल विवाह के नुकसान

  • अधिकारों से वंचना: बाल विवाह बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य, सही पोषण और शिक्षा के मौलिक अधिकार से दूर कर देता है।
  • उत्पीड़न का खतरा: कम उम्र में विवाह के कारण लड़कियों को घरेलू हिंसा, दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का अधिक सामना करना पड़ता है।
  • विकास पर असर: यह लड़का और लड़की दोनों के शारीरिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

​कानूनन दंड का प्रावधान

​कार्यक्रम में सचेत किया गया कि बाल विवाह का आयोजन करने, उसे बढ़ावा देने या उसमें शामिल होने पर कड़े दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 2 वर्ष का कारावास, ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं।

​इन मुख्य विषयों पर भी दी गई जानकारी

​सखी वार्ता में बाल विवाह के अलावा समाज में व्याप्त अन्य कुप्रथाओं और सुरक्षा कानूनों पर भी विस्तार से बात की गई:

  1. ​लैंगिक भेदभाव (जेंडर असमानता) का खात्मा
  2. ​दहेज प्रथा का विरोध
  3. ​पॉक्सो (POCSO) एक्ट और घरेलू हिंसा से बचाव

​इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिकाएं, बड़ी संख्या में छात्राएं और जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ विमेन कार्यालय के लैंगिक विशेषज्ञ व वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

संवाददाता अमरजीत सिंह 

Sachcha Samachar Desk

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