मोतिहारी (बिहार): पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने आम जनता को राहत देने के लिए “सहयोग शिविर” अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राजस्व न्यायालयों (Revenue Courts) में वर्षों से लंबित पड़े भूमि संबंधी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करना है।
राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा
इसी कड़ी में जिला प्रशासन की टीम ने ढाका स्थित भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) के न्यायालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने न्यायालय में चल रहे पुराने केस, फाइलों के रख-रखाव और सुनवाई की वर्तमान स्थिति की बारीकी से जांच की। प्रशासन ने पाया कि कई मामले लंबे समय से प्रक्रिया में हैं, जिन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन महीने के भीतर केस खत्म करने का लक्ष्य
निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी पुराने और लंबित मामलों को पूरी तरह निष्पादित कर दिया जाए। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने को कहा गया है:
- नियमित सुनवाई: केस की तारीखें लंबी न हों और सुनवाई नियमित अंतराल पर की जाए।
- पारदर्शिता: कोर्ट की हर कार्यवाही पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
- अनावश्यक देरी पर रोक: बिना किसी ठोस कारण के किसी भी मामले को लटका कर न रखा जाए।
”सहयोग शिविर” से आम जनता को क्या होगा लाभ?
जिला प्रशासन का “सहयोग शिविर” अभियान सीधे तौर पर उन ग्रामीणों और किसानों के लिए मददगार साबित हो रहा है, जो भूमि विवादों के कारण अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।
- समय की बचत: मामलों के त्वरित निष्पादन से लोगों को न्याय के लिए सालों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- पारदर्शी प्रक्रिया: प्रशासन की सीधी निगरानी से भ्रष्टाचार और लापरवाही पर लगाम लगेगी।
- समयबद्ध न्याय: जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि हर नागरिक की समस्या का समाधान एक निश्चित समय सीमा के भीतर हो सके।
जिला प्रशासन ने कड़े शब्दों में कहा है कि आम लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता बरती जाए और न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संवाददाता अमरजीत सिंह






