बिहार के मोतिहारी से एक सुखद खबर सामने आई है। शहर के बाईपास रोड स्थित विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान, 4 वर्षीय मासूम बच्ची ‘रंजना’ (बदला हुआ नाम) को उसके नए माता-पिता को सौंप दिया गया।
इस भावुक पल के दौरान प्रशासन और संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गुजरात का दंपत्ति बनेगा रंजना का सहारा
बच्ची को गोद लेने वाले माता-पिता मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। बच्ची के नए पिता गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GIDC) में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) श्री निशांत सिहारा ने आधिकारिक रूप से बच्ची को दंपत्ति के हवाले किया।
इस विशेष अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक श्री अक्षय कुमार, बाल कल्याण समिति के सदस्य और संस्थान के कर्मचारी भी उपस्थित थे।
इस साल का तीसरा सफल दत्तकग्रहण
मोतिहारी के विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। आंकड़ों के अनुसार:
- यह इस साल का तीसरा अवसर है जब किसी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद दिया गया है।
- वर्तमान में इस संस्थान में 0 से 6 वर्ष की आयु के 6 अन्य बच्चे रह रहे हैं, जो अपने स्थायी घर और परिवार का इंतजार कर रहे हैं।
क्या है बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया?
भारत में बच्चा गोद लेना एक पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया है। यदि कोई भी दंपत्ति बच्चा गोद लेना चाहता है, तो वे निम्नलिखित तरीके से आवेदन कर सकते हैं:
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- CARA पोर्टल पर पंजीकरण: इच्छुक माता-पिता को ‘केन्द्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (CARA) की आधिकारिक वेबसाइट cara.wcd.gov.in पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- निगरानी: CARA भारत सरकार की वह संस्था है जो देश और विदेश (देशीय एवं अन्तर्देशीय) में गोद लेने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है।
- जिला स्तरीय भूमिका: जिला स्तर पर ‘विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान’ और ‘जिला बाल संरक्षण इकाई’ इस प्रक्रिया को सुरक्षित और सुगम बनाने का कार्य करती हैं।
नोट: बच्चा गोद लेने के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही सहारा लें। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि बच्चे और माता-पिता दोनों के भविष्य के लिए कानूनी रूप से मान्य है।






