बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने मोतिहारी सेंट्रल जेल में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिलाधिकारी (DM) सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में हुई इस औचक छापेमारी से जेल परिसर में हड़कंप मच गया। हालांकि, घंटों चली बारीकी से जांच के बाद पुलिस को कोई भी आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ।
चप्पे-चप्पे की हुई तलाशी, सुरक्षा मानकों को परखा गया
प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने जेल के भीतर कैदियों के सभी वार्डों और बैरकों की गहन तलाशी ली। इस दौरान न केवल कैदियों के बिस्तर और निजी सामान को खंगाला गया, बल्कि जेल की रसोई, मुलाकात कक्ष और स्टाफ क्वार्टर की भी जांच की गई।
सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले हर कोने का निरीक्षण किया गया ताकि मोबाइल फोन, नशीले पदार्थ या किसी भी प्रकार के हथियारों की उपलब्धता की संभावना को खत्म किया जा सके।
बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में चला अभियान
इस विशेष अभियान में डीएम और एसपी के अलावा जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
- अनुमंडल पदाधिकारी (सदर)
- अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर)
- साइबर डीएसपी
साइबर डीएसपी की मौजूदगी विशेष रूप से जेल के भीतर से होने वाली किसी भी संभावित डिजिटल या साइबर अपराध की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुनिश्चित की गई थी।
”सुरक्षा और अनुशासन पहली प्राथमिकता” – जिलाधिकारी
छापेमारी के बाद मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बताया कि यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल परिसर को सुरक्षित और अनुशासित रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
”हमारा ध्यान जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास पर है, लेकिन जेल नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” – सौरभ जोरवाल, डीएम
जेल प्रशासन की सतर्कता की सराहना
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने अभियान के सफल संचालन पर संतोष व्यक्त किया। जेल में कोई भी प्रतिबंधित वस्तु न मिलना स्थानीय जेल प्रशासन की सक्रियता और सतर्कता को दर्शाता है। एसपी ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत करें और भविष्य में भी इसी तरह की सतर्कता बनाए रखें।
क्या है इस छापेमारी का महत्व?
बिहार में पिछले कुछ समय से जेलों के भीतर से आपराधिक गतिविधियों के संचालन की खबरें आती रही हैं। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर सभी प्रमुख जेलों में समय-समय पर ‘सरप्राइज चेकिंग’ की जा रही है। मोतिहारी जेल में हुई यह कार्रवाई भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है, ताकि जेलों को केवल सजा का केंद्र नहीं बल्कि वास्तविक ‘सुधार गृह’ बनाया जा सके।






