भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के तहत, प्रशासन की टीम ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का दौरा किया और वहां मौजूद ऐतिहासिक पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य शुरू किया।
50 प्राचीन ग्रंथों का हुआ डिजिटलीकरण
इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में सुरक्षित रखी गई 50 दुर्लभ पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण (Digitalization) किया गया। इन हस्तलिखित ग्रंथों में सदियों पुराना ज्ञान समाहित है, जिसे अब डिजिटल रूप में सुरक्षित कर लिया गया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य इन अमूल्य धरोहरों को समय के साथ नष्ट होने से बचाना है। अब आने वाली पीढ़ियां और शोध कार्य करने वाले विद्यार्थी इन ग्रंथों को आसानी से पढ़ सकेंगे और इनका लाभ उठा सकेंगे।
क्या है ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान?
’ज्ञान भारतम्’ अभियान राष्ट्रीय पांडुलिपि प्रलेखन का एक हिस्सा है। इसका लक्ष्य देश के कोने-कोने में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों और हस्तलिखित ग्रंथों की खोज करना, उनका संरक्षण करना और उन्हें आधुनिक तकनीक की मदद से डिजिटल फॉर्मेट में बदलना है।
जिला प्रशासन की जनता से विशेष अपील
पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए आम जनता और विभिन्न संस्थाओं से सहयोग मांगा है। प्रशासन ने अपील की है कि:
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- यदि किसी व्यक्ति, मंदिर, पुस्तकालय या निजी संस्था के पास कोई प्राचीन पांडुलिपि या हस्तलिखित ग्रंथ उपलब्ध है, तो वे इसकी जानकारी साझा करें।
- लोग ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप डाउनलोड करके अपने पास मौजूद ग्रंथों का पंजीकरण कर सकते हैं।
- ग्रंथों के संरक्षण और सूचीकरण के लिए सीधे जिला प्रशासन से भी संपर्क किया जा सकता है।
विशेष नोट: पांडुलिपियां हमारे देश की सांस्कृतिक पहचान हैं। इनका संरक्षण करना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है ताकि हमारी प्राचीन विद्या लुप्त न हो।
संपादक की राय: तकनीक के माध्यम से पुरानी धरोहरों को सहेजना एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल इतिहास सुरक्षित रहता है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नए रास्ते भी खुलते हैं।






