मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में फाइलेरिया (हाथीपाँव) को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय है। इसी अभियान के तहत केंद्रीय कारा मोतिहारी में एक विशेष शिविर आयोजित किया गया, जहाँ जेल अधीक्षक और चिकित्सा पदाधिकारी की मौजूदगी में 2440 कैदियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई गई।
जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल
जिले के 27 प्रखंडों में ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (MDA) मॉप-अप अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम जिला कारागार पहुंची। कारा अधीक्षक और कारा चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नंद किशोर कुमार की देखरेख में महिला और पुरुष कैदियों को उनकी उम्र के अनुसार डी.ई.सी (DEC) और एल्बेंडाजोल की दवा दी गई।
”बचाव ही एकमात्र उपाय” – डॉ. नंद किशोर कुमार
दवा का सेवन करते हुए कारा अधीक्षक ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है और इससे बचाव के लिए सर्वजन दवा का सेवन बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया:
”जेल के कैदी अब इस दवा के सेवन से सुरक्षित हो गए हैं। दवा खिलाने से पहले यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी कैदी खाली पेट न हो या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित न हो।”
वहीं, जिला यक्षमा अस्पताल के अनिल कुमार ने बताया कि 15 फरवरी तक जो लोग दवा खाने से छूट गए थे, उन्हें अब इस मॉप-अप राउंड के जरिए कवर किया जा रहा है।
लगातार 5 साल तक दवा का सेवन है अनिवार्य
पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि पप्पू कुमार ने कैदियों को जागरूक करते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक साल में एक बार फाइलेरिया की दवा खाता है, तो उसके शरीर में मौजूद फाइलेरिया के कृमि नष्ट हो जाते हैं।
नियमित स्वास्थ्य जांच पर जोर
जिला यक्षमा पदाधिकारी डॉ. संजीव के अनुसार, जेल में कैदियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाती है। फाइलेरिया के साथ-साथ समय-समय पर निम्नलिखित जांचें भी होती हैं:
- टीबी (TB) और एचआईवी (HIV)
- ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल
- वजन और अन्य सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण
उपस्थिति: इस अवसर पर संचारी रोग कार्यक्रम पदाधिकारी अनिल कुमार, गांधी फेलो, मेडिकल फेलो, करुणा फेलो, आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
संवाददाता: अमरजीत सिंह (मोतिहारी)








