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क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार? दुनिया भर में संघर्षों को सुलझाने का दावा

On: August 29, 2025 9:47 PM
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क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार? दुनिया भर में संघर्षों को सुलझाने का दावा
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नई दिल्ली। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अक्सर अपने बयानों और कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका एक भाषण फिर सुर्खियों में आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में दुनिया के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई थी। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान जैसे सदियों पुराने विवादित रिश्तों को भी बातचीत के जरिए शांति की ओर मोड़ दिया था।

ट्रंप के इस दावे ने न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाई, बल्कि एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए नामित किया जा सकता है।


ट्रंप का दावा: “मैंने लगभग हर महीने एक संघर्ष सुलझाया”

अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों के बीच शांति समझौतों या युद्धविराम की दिशा में काम किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने –

  • थाईलैंड और कंबोडिया,
  • इज़राइल और ईरान,
  • रवांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य,
  • भारत और पाकिस्तान,
  • सर्बिया और कोसोवो,
  • मिस्र और इथियोपिया

के बीच संघर्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा दी।

ट्रंप ने यहां तक कहा कि अपने छह महीनों के कार्यकाल में उन्होंने लगभग “प्रति माह एक शांति समझौता” करवाया, जो किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए असामान्य उपलब्धि मानी जा सकती है।


भारत-पाकिस्तान विवाद पर ट्रंप की टिप्पणी

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा विवाद दुनिया के सबसे जटिल भू-राजनीतिक मुद्दों में से एक है। कश्मीर मुद्दा, सीमा विवाद, और आतंकी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध भी हो चुके हैं।

ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि उन्होंने इस संघर्ष को “अचानक शांत” किया। उन्होंने कहा –

“मैं यह नहीं कहना चाहता कि मैंने किया, लेकिन मैंने जरूर मदद की। पिछले हफ्ते भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति बहुत तनावपूर्ण थी। मिसाइलों की धमकी तक बात पहुंच गई थी। लेकिन हमने दोनों देशों को समझाया कि युद्ध की बजाय व्यापार करें। पाकिस्तान बहुत खुश हुआ, भारत भी खुश हुआ। मुझे लगता है कि अब वे शांति की ओर बढ़ रहे हैं।”

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह समस्या “हजारों साल पुरानी” है और इसे स्थायी रूप से सुलझाना आसान नहीं है।


क्या वास्तव में शांति हुई?

यहां बड़ा सवाल यह उठता है कि ट्रंप के इन बयानों की सच्चाई कितनी है।

  1. भारत-पाकिस्तान
    • उनके कार्यकाल के दौरान पुलवामा हमला (2019) और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी घटनाएं हुईं, जिनमें तनाव चरम पर पहुंच गया था।
    • हालांकि, अमेरिका ने बैकचैनल डिप्लोमेसी में जरूर भूमिका निभाई थी ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं।
    • लेकिन यह कहना कि भारत और पाकिस्तान का विवाद “सुलझ” गया, पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है।
  2. इज़राइल और ईरान
    • ट्रंप के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच तनाव और भी बढ़ गया था। उन्होंने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर दिया था।
    • इज़राइल और ईरान की दुश्मनी में किसी ठोस शांति समझौते की पुष्टि नहीं मिलती।
  3. रवांडा और कांगो
    • अफ्रीका में संघर्ष कम करने की कोशिशें कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने की थीं, लेकिन ट्रंप की व्यक्तिगत भूमिका सीमित रही।

इसलिए ट्रंप के बयानों को अधिकतर विश्लेषक “राजनीतिक दावा” मानते हैं, न कि पक्की ऐतिहासिक उपलब्धि।


नोबेल शांति पुरस्कार की बहस

डोनाल्ड ट्रंप का नाम पहले भी नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चाओं में आ चुका है। खासकर अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के समय, जब उनके कार्यकाल में इज़राइल और कई अरब देशों (जैसे यूएई, बहरीन, मोरक्को) के बीच कूटनीतिक रिश्ते सामान्य हुए थे। इसे आधुनिक मध्य-पूर्व की बड़ी उपलब्धि माना गया।

नोबेल पुरस्कार समिति आमतौर पर उन नेताओं को सम्मानित करती है जिन्होंने युद्ध और संघर्ष को स्थायी शांति में बदला हो। बराक ओबामा को भी शुरुआती कार्यकाल में शांति पुरस्कार दिया गया था, हालांकि उस समय उनकी उपलब्धियों पर भी सवाल उठे थे।


ट्रंप के दावे पर दुनिया की प्रतिक्रिया

ट्रंप के भाषण के बाद दुनिया भर में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

  • समर्थन में:
    उनके समर्थकों का कहना है कि ट्रंप ने दुनिया को युद्धों से बचाने की कोशिश की और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को व्यापार और सहयोग की ओर मोड़ा। इसलिए उन्हें शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
  • आलोचना में:
    आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का बयान अतिशयोक्तिपूर्ण है। कई जगह उन्होंने शांति नहीं बल्कि तनाव और बढ़ाया।
    उदाहरण के लिए, ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकलना, चीन के साथ ट्रेड वॉर, और नाटो सहयोगियों से टकराव।

भारत-पाकिस्तान: क्या सच में शांति संभव है?

भारत और पाकिस्तान का रिश्ता जटिल है।

  • इतिहास: 1947 के विभाजन से लेकर अब तक दोनों देश चार बार युद्ध लड़ चुके हैं।
  • कश्मीर मुद्दा: आज भी सबसे बड़ा विवाद यही है।
  • आतंकवाद: पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों की गतिविधियां भारत के लिए बड़ी चुनौती हैं।

हालांकि, व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए शांति की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। कई अंतरराष्ट्रीय नेता अतीत में भी इन दोनों देशों को साथ लाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज भी दूर है।


निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप का दावा कि उन्होंने छह महीनों में छह बड़े संघर्ष सुलझाए, एक साहसी बयान जरूर है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से इसकी पुष्टि नहीं मिलती।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में अमेरिका की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह कहना कि “समस्या सुलझ गई”, वास्तविकता से बहुत दूर है।

फिर भी, ट्रंप की यह शैली—जहां वे खुद को हर समस्या का समाधान बताने वाले नेता के रूप में पेश करते हैं—उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है।

जहां तक नोबेल शांति पुरस्कार की बात है, यह समिति पर निर्भर करता है कि वे किसे सम्मानित करती है। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप का यह दावा आने वाले समय में राजनीति और कूटनीति की चर्चाओं में जरूर गूंजता रहेगा।


✍️ लेखक का दृष्टिकोण:
यह आर्टिकल तथ्यों और बयानों पर आधारित है। इसमें किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं किया गया है। उद्देश्य केवल पाठकों तक सटीक और संतुलित जानकारी पहुंचाना है।

Sachcha Samachar Desk

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