बिहार 

तियानजिन में एससीओ समिट 2025: औपनिवेशिक जख्मों से नए विश्व व्यवस्था तक का सफर

On: August 29, 2025 11:59 PM
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तियानजिन में एससीओ समिट 2025: औपनिवेशिक जख्मों से नए विश्व व्यवस्था तक का सफर
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अगले 48 घंटों में चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। यह आयोजन केवल एक डिप्लोमैटिक मीटिंग नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों का प्रतीक भी माना जा रहा है। बीजिंग या शंघाई की जगह तियानजिन का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि यह शहर कभी विदेशी ताकतों के कब्जे में था और आज वही शहर चीन की ताकत, महत्वाकांक्षा और नए वैश्विक संदेश का मंच बन गया है।


क्यों तियानजिन बना आयोजन स्थल?

चीन की राजधानी बीजिंग देश का राजनीतिक केंद्र है और शंघाई आर्थिक शक्ति का प्रतीक। स्वाभाविक रूप से इनमें से किसी एक शहर में सम्मेलन होना अपेक्षित था। लेकिन बीजिंग ने तियानजिन का चयन कर एक बड़ा संदेश दिया है।

तियानजिन चीन का चौथा सबसे बड़ा शहर है और “आउटडोर म्यूजियम” के नाम से जाना जाता है। यहां की “फाइव ग्रेट एवन्यूज” (Five Great Avenues) में 2000 से अधिक ऐतिहासिक इमारतें हैं, जिनमें से 400 से ज्यादा संरक्षित धरोहर घोषित की जा चुकी हैं। ये भवन चीन के औपनिवेशिक अतीत की गवाही देते हैं, जब 19वीं सदी में विदेशी शक्तियों ने यहां “कंसेशन” सिस्टम के जरिए अपने-अपने क्षेत्र बना लिए थे।

उस दौर में तियानजिन के अलग-अलग हिस्से ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अन्य देशों के अधीन थे। इन कंसेशंस में चीनी प्रशासन का कोई अधिकार नहीं था—वे छोटे-छोटे देशों की तरह काम करते थे जिनके अपने कानून, पुलिस और प्रशासन होते थे।

आज वही सड़कें और इमारतें पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में हैं। औपनिवेशिक भवनों में अब चीनी रेस्टोरेंट, कैफे और शॉपिंग आउटलेट्स हैं। इसीलिए तियानजिन में एससीओ समिट का आयोजन एक प्रतीकात्मक संदेश देता है—कभी पश्चिमी उपनिवेशवाद का शिकार यह शहर आज पश्चिमी वर्चस्व को चुनौती देने वाले वैश्विक मंच का मेजबान है।


रणनीतिक महत्व: बेल्ट एंड रोड का अहम केंद्र

तियानजिन केवल इतिहास की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी चीन के लिए बेहद अहम है।

  • यह शहर बोहाई खाड़ी पर स्थित है और बीजिंग का समुद्री द्वार माना जाता है।
  • तियानजिन पोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है और 180 से अधिक देशों से जुड़ा हुआ है।
  • यह शहर चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में एक प्रमुख नोडल प्वाइंट है, जहां से यूरोप और मध्य एशिया के लिए मालगाड़ियां सीधे चलती हैं।
  • हाल ही में शुरू हुई तियानजिन-उज्बेकिस्तान रेल सेवा ने डिलीवरी दूरी 800 किलोमीटर तक घटा दी है।

स्पष्ट है कि एससीओ देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए तियानजिन एक आदर्श प्रतीक है।


एससीओ: 40% जनसंख्या और 25% जीडीपी का प्रतिनिधि

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दुनिया की सबसे बड़ी बहुपक्षीय संस्थाओं में से एक है। इसमें चीन, भारत, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देश शामिल हैं।

  • एससीओ दुनिया की लगभग 40% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • संगठन की संयुक्त जीडीपी वैश्विक अर्थव्यवस्था का 25% है।
  • यह मंच न केवल सुरक्षा, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी काम करता है।

इसलिए, एससीओ का हर सम्मेलन केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत होता है।


पश्चिम बनाम ग्लोबल साउथ: प्रतीकात्मक संदेश

जहां G7 देश अक्सर अपने सम्मेलन आलीशान रिसॉर्ट्स या ऐतिहासिक किलों में आयोजित करते हैं, वहीं चीन ने एससीओ समिट के लिए तियानजिन जैसे शहर को चुना।

यह चुनाव साफ संदेश देता है कि

  • पश्चिम द्वारा उपनिवेश बनाए गए शहर आज “ग्लोबल साउथ” की नई आवाज बन रहे हैं।
  • तियानजिन जो कभी विदेशी ताकतों का प्रवेश द्वार था, आज “ग्लोबल साउथ” का नया द्वार बनकर उभर रहा है।
  • चीन दिखाना चाहता है कि वह न केवल अतीत के घाव भर चुका है, बल्कि भविष्य की विश्व व्यवस्था भी गढ़ने की स्थिति में है।

भारत के लिए बड़ा अवसर और चुनौती

इस सम्मेलन का एक और बड़ा पहलू है—भारत की भूमिका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं और यह उनकी बहुपक्षीय कूटनीति का सबसे बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है।

  • भारत-चीन संबंध: लद्दाख सीमा विवाद के बाद से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में तियानजिन शिखर सम्मेलन रिश्तों को रीसेट करने का मौका भी हो सकता है।
  • भारत-रूस साझेदारी: रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत-रूस संबंधों की अहमियत और बढ़ गई है। एससीओ भारत को रूस के साथ संतुलन साधने का मंच देता है।
  • मल्टी-अलाइनमेंट पॉलिसी: भारत अब तक अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन सभी से रिश्ते संभालने की नीति अपनाता रहा है। लेकिन बढ़ते वैश्विक तनाव और “ट्रेड वॉर” के दौर में यह नीति कठिन परीक्षा से गुजर रही है।

यानी, यह सम्मेलन भारत के लिए भी अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर है।


निष्कर्ष

तियानजिन में होने वाला एससीओ समिट इतिहास, भू-राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का संगम है।

  • यह शहर चीन के औपनिवेशिक अतीत और वर्तमान महाशक्ति बनने की यात्रा का प्रतीक है।
  • यह आयोजन पश्चिमी व्यवस्था को चुनौती और “ग्लोबल साउथ” की एकजुटता का संदेश है।
  • भारत सहित सभी सदस्य देशों के लिए यह सम्मेलन नए अवसर और चुनौतियां लेकर आया है।

आखिरकार, तियानजिन का चुनाव केवल एक शहर का चयन नहीं, बल्कि भविष्य की विश्व व्यवस्था के नक्शे पर चीन की महत्वाकांक्षा का ऐलान है।

Sachcha Samachar Desk

Sachcha Samachar Desk वेबसाइट की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो देश और दुनिया से जुड़ी ताज़ा, तथ्य-आधारित और निष्पक्ष खबरें तैयार करती है। यह टीम विश्वसनीयता, ज़िम्मेदार पत्रकारिता और पाठकों को समय पर सही जानकारी देने के सिद्धांत पर काम करती है।

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