दरभंगा (बिहार)। बिहार की धरती पर रविवार, 27 अगस्त का दिन राजनीति के इतिहास में एक भावुक पल लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और राजद (आरजेडी) नेताओं द्वारा उनकी दिवंगत मां पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त की। इस दौरान उनका स्वर केवल राजनीतिक हमला करने वाला नहीं था, बल्कि मां के प्रति गहरी संवेदनाओं से भरा हुआ था।
पीएम मोदी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि –
“बिहार की संस्कृति में मां का स्थान देवताओं से ऊपर है। लेकिन मेरी मां को गाली देना सिर्फ मेरा अपमान नहीं, बल्कि इस देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का अपमान है।”
यह बयान आते ही बिहार का राजनीतिक माहौल गरमा गया। एक तरफ कांग्रेस और राजद के नेताओं पर निशाना साधा गया, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने बिहार की महिलाओं के लिए 105 करोड़ रुपये की आर्थिक सौगात भी दी।
7 दिन तक चुप्पी, फिर छलका दर्द
पीएम मोदी ने कहा कि बीते दिनों कांग्रेस और आरजेडी के मंच से उनकी दिवंगत मां के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गईं। वह सात दिनों तक चुप रहे, लेकिन अंततः अपने दिल का दर्द छिपा नहीं सके।
प्रधानमंत्री ने बेहद भावुक अंदाज़ में अपनी मां को याद किया। उन्होंने कहा कि –
“मेरी मां बरसात में छत की मरम्मत खुद करवाती थीं ताकि घर में पानी न टपके। बीमार रहतीं, लेकिन कभी जताती नहीं थीं। अपने लिए कभी नई साड़ी तक नहीं खरीदी। हर पैसा बच्चों की पढ़ाई और कपड़ों के लिए बचाया। उन्होंने मुझे आपके लिए समर्पित कर दिया।”
इस दौरान मोदी की आवाज़ कई बार भारी हो गई। उनके चेहरे पर पीड़ा साफ झलक रही थी।
कांग्रेस-आरजेडी पर सीधा हमला
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस को सीधे तौर पर घेरा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का जन्म “शाही खानदान” में हुआ है, जिनके हाथ में बचपन से सोने-चांदी का चम्मच रहा है, वे गरीब मां के संघर्ष को समझ ही नहीं सकते।
उन्होंने याद दिलाया कि बिहार चुनावों में भी उन्हें “गंदी नाली का कीड़ा” और “जहर वाला सांप” तक कहा गया था।
मोदी ने कहा –
“यह नामदार सोचते हैं कि सत्ता उनकी विरासत है। गरीब की मेहनत और गरीब की मां का आशीर्वाद इन्हें कभी स्वीकार नहीं होता।”
बिहार की महिलाओं के लिए सौगात
भावनाओं से भरे इस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने बिहार की महिलाओं के लिए एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने जीविका योजना के तहत 105 करोड़ रुपये की राशि सीधे महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की।
यह कदम केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि बिहार की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम संदेश माना जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार की महिलाएं आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ हैं और केंद्र सरकार उनके लिए लगातार काम कर रही है।
बिहार की संस्कृति और “माई” का महत्व
अपने संबोधन में मोदी ने खास तौर पर बिहार की संस्कृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां “माई” (मां) का स्थान सबसे ऊंचा है। चाहे नवरात्र का पर्व हो या छठ पूजा, यहां हर उत्सव मां की ममता और आशीर्वाद से ही पूर्ण होता है।
उन्होंने लोगों से अपील की –
“भारत की धरती मां का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। आने वाले नवरात्र और छठ महापर्व पर संकल्प लें कि मां का अपमान करने वालों को जवाब देंगे।”
राजनीतिक असर और आने वाले दिन
बिहार की राजनीति में यह बयान बड़ा मोड़ ला सकता है।
- एक ओर कांग्रेस और आरजेडी नेताओं की कथित टिप्पणी विपक्ष के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।
- दूसरी ओर, पीएम मोदी का भावुक संबोधन और महिलाओं के लिए की गई आर्थिक घोषणा भाजपा को राजनीतिक लाभ भी दिला सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावी मौसम में “मां के सम्मान” का मुद्दा बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है।
विपक्ष की मुश्किलें
कांग्रेस और आरजेडी ने भले ही इस मामले पर सफाई दी हो, लेकिन बिहार की जनता में इस विवाद का असर गहरा हो सकता है। ग्रामीण और शहरी, दोनों समाजों में मां का सम्मान एक गहरी भावनात्मक बात है। इसीलिए भाजपा इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।
भावनात्मक अपील के साथ समापन
अपने संबोधन के आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि –
“मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन मां का अपमान हर भारतीय के दिल को चोट पहुंचाता है। मैं बिहार की धरती से हर बेटे से कहता हूं – मां का अपमान मत सहो। जवाब दो।”
इसके साथ ही उन्होंने युवाओं और महिलाओं से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करें और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दें।
निष्कर्ष
बिहार की राजनीति इस समय एक भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दे के इर्द-गिर्द घूम रही है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन सिर्फ एक राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि मां के सम्मान का सवाल उठाने वाला भावनात्मक पल था।
अब देखना यह होगा कि जनता इस अपील को किस रूप में स्वीकार करती है और क्या सचमुच आने वाले चुनावों में यह मुद्दा निर्णायक साबित होगा। लेकिन इतना तय है कि बिहार की धरती पर “मां” का सम्मान हमेशा राजनीति से ऊपर रहेगा।
✍️ लेखक की टिप्पणी:
यह आर्टिकल निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण के साथ लिखा गया है। इसमें न तो किसी पार्टी का प्रचार है और न ही विरोध, बल्कि केवल घटनाओं और बयानों का सटीक और संवेदनशील चित्रण है।










