महाने नदी के मंजूरा घाट पर पुलिस की कार्रवाई
बिहार के मुंगेर जिले में अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने गई पुलिस टीम पर बालू माफियाओं ने हमला कर दिया। यह घटना जिले के टेटिया बंबर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महाने नदी के मंजूरा घाट की है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि घाट से अवैध रूप से बालू निकालकर ट्रैक्टर पर लादा जा रहा है और उसे प्लास्टिक की बोरियों में भरा जा रहा है। सूचना के आधार पर मौके पर पहुंची पुलिस ने बालू लोड कर रहे सुमेश कुमार नाम के युवक को हिरासत में लिया।
माफियाओं का दुस्साहस: धक्का-मुक्की और पत्थरबाजी
पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के विरोध में बालू माफिया उग्र हो गए। घटनास्थल पर विवेक कुमार उर्फ मयंक कुमार, वरुण कुमार सिंह और अन्य लोग आ गए। इन लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
प्राथमिकी (FIR) में दर्ज तथ्यों के अनुसार, विवेक कुमार पर ईंट-पत्थर चलाने और पुलिस की गिरफ्त से सुमेश कुमार को जबरन छुड़ाने का आरोप है। वहीं, वरुण कुमार सिंह पर आरोप है कि उसने सुमेश को उसकी ‘ग्लैमर’ मोटरसाइकिल पर बैठाकर भगाने में मदद की। स्थिति को गंभीर बनाते हुए, एक आरोपी मौके पर लाइसेंसी राइफल लेकर भी पहुंच गया था, जिसका उद्देश्य पुलिस टीम पर दबाव बनाना और उन्हें डराना था।
24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली
इस दुस्साहसिक घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी टेटिया बंबर थाना पुलिस किसी भी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। घटना के संबंध में 3 नामजद और 5 अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की तरफ से फिलहाल यही आधिकारिक जानकारी दी गई है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
मुंगेर एसपी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है। मुंगेर के पुलिस अधीक्षक (SP) सैयद इमरान मसूद ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुलिस बल पर किया गया हमला किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसपी ने टेटिया बंबर के थानाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और इस कार्रवाई में पूरी ताकत झोंक दी जाए।
मुंगेर में पुलिस पर हमले का पुराना इतिहास
मुंगेर जिले में बालू माफियाओं द्वारा पुलिस या प्रशासन की टीम पर हमला करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी माफिया कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देते रहे हैं:
- अगस्त 2025: हेरू दियारा क्षेत्र में परिवहन विभाग की टीम पर हमला किया गया था। इस घटना में एक महिला दारोगा सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- सितंबर 2021: मनिया बालू घाट पर छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर माफियाओं ने फायरिंग की थी।
- जुलाई 2020: पृथ्वीचक में अवैध खनन की जांच के लिए गई पुलिस टीम को भी हिंसक हमले का सामना करना पड़ा था।
अवैध बालू खनन: कानून-व्यवस्था और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती
बिहार में नदियों से अवैध बालू खनन एक बड़ा और संगठित आर्थिक अपराध बन चुका है। यह कारोबार न केवल राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाता है, बल्कि नदियों के प्राकृतिक बहाव और जलीय पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचाता है। मुंगेर जैसे जिलों में महाने और अन्य नदियों के घाटों पर वर्चस्व को लेकर माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय है। ये समूह अक्सर पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती पैदा करते हैं। मंजूरा घाट की घटना यह स्पष्ट करती है कि जमीनी स्तर पर इस अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त करने और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को और अधिक रणनीतिक और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।








