बिहार के मोतिहारी जिले से सरकारी स्कूल के बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। अरेराज प्रखंड के एक विद्यालय में बच्चों को परोसे गए भोजन में कीड़े और सड़े हुए अंडे मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा विभाग और मिड-डे मील (MDM) की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 17 अप्रैल को राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, जनेरवा में हुई। दोपहर के भोजन के दौरान जब बच्चों को मिड-डे मील परोसा गया, तो खाने में कीड़े और सड़े हुए अंडे दिखाई दिए। इसकी जानकारी मिलते ही अभिभावकों ने स्कूल में जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी भोजन की खराब गुणवत्ता की पुष्टि की।
अधिकारियों की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
एसडीओ (SDO) के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और दंडाधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान न केवल भोजन की गुणवत्ता खराब मिली, बल्कि छात्रों की उपस्थिति के रिकॉर्ड में भी भारी हेरफेर और फर्जीवाड़ा पाया गया। बीडीओ ने मौके से अंडे के सैंपल जब्त कर जांच के लिए भेजे और स्कूल के प्रधानाध्यापक व संबंधित एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।
प्रशासन की सुस्ती पर उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि घटना 17 अप्रैल को हुई और प्रशिक्षु आईएएस सह एसडीओ अंजली शर्मा ने उसी दिन कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था, लेकिन विभाग को जागने में 15 दिन लग गए।
- 30 अप्रैल को हुई पहल: डीपीओ (MDM) ने 15 दिन बाद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया।
- जांच टीम: इस कमेटी में बीईओ, डीपीएम और लेखपाल शामिल हैं।
- समय सीमा: टीम को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
एनजीओ की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
अरेराज प्रखंड के कुल 33 स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी ‘सुभारती जनकल्याण समिति’ नामक एनजीओ के पास है।
नोट: इस एनजीओ पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। कुछ समय पहले लौरिया स्कूल में भी खाने में कीड़े मिलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बावजूद एनजीओ के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होना सिस्टम की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
उपस्थिति में गड़बड़ी का पुराना रिकॉर्ड
इस स्कूल का रिकॉर्ड पहले से ही विवादों में रहा है। घटना से महज एक सप्ताह पहले एसडीओ के निरीक्षण में भी बच्चों ने खाने की शिकायत की थी और छात्रों की हाजिरी में गड़बड़ी पाई गई थी, जिस पर बीईओ से जवाब तलब किया गया था।
निष्कर्ष: जवाबदेही की दरकार
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह की लापरवाही गंभीर अपराध है। प्रशासन ने अब जांच कमेटी तो बना दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या दोषी एनजीओ और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी? बच्चों की थाली में गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।






