भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पटना की टीम ने पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बैंक कर्मियों, सुरक्षा बलों और आम जनता को नकली नोटों की पहचान करने और डिजिटल ठगी (साइबर फ्रॉड) से सुरक्षित रहने के तरीके सिखाना था।
सीमावर्ती जिला होने के कारण सतर्कता जरूरी
पूर्वी चंपारण की सीमा नेपाल से सटे होने के कारण यहाँ नकली नोटों के अवैध प्रचलन और साइबर अपराध का खतरा अधिक रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई के महाप्रबंधक श्री अमित कुमार और उपमहाप्रबंधक श्री नीरज कुमार की मौजूदगी में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में राज्य पुलिस, सशस्त्र सीमा बल (SSB) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) के अधिकारी भी शामिल हुए।
प्रशिक्षण के तीन मुख्य चरण
इस पूरे कार्यक्रम को तीन अलग-अलग सत्रों में बांटा गया था ताकि हर वर्ग को उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी मिल सके:
1. बैंक कर्मियों के लिए विशेष सत्र
पहले सत्र में बैंक अधिकारियों को नोटों के सुरक्षा फीचर्स (Security Features) की बारीकी से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि:
- असली और नकली नोटों के बीच व्यावहारिक अंतर क्या है?
- कटे-फटे या गंदे नोटों को बदलने के नियम क्या हैं?
- बैंक में नकली नोट आने पर उसकी रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट कैसे करना है।
2. सुरक्षा बलों और कानून एजेंसियों का क्षमतावर्धन
दूसरे सत्र में पुलिस, SSB और ATS के जवानों को प्रशिक्षित किया गया। चूंकि ये एजेंसियां सीमा पर तैनात रहती हैं, इसलिए उन्हें भारतीय मुद्रा की सुरक्षा विशेषताओं और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से बताया गया ताकि वे नकली नोटों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगा सकें।
3. आम जनता के लिए ‘टाउनहॉल’ मीटिंग
तीसरे सत्र में आम नागरिकों के साथ सीधा संवाद किया गया। इसमें लोगों को बताया गया कि वे रोजमर्रा के लेन-देन में नकली नोटों को कैसे पहचान सकते हैं। साथ ही, विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बदलते समय केवल अधिकृत केंद्रों का ही उपयोग करने की सलाह दी गई।
साइबर सुरक्षा और ‘पैसा बोलता है’ अभियान
आरबीआई अधिकारियों ने डिजिटल भुगतान के दौर में बढ़ते साइबर खतरों के प्रति भी आगाह किया। नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के टिप्स दिए गए और आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट ‘पैसा बोलता है’ (www.paisaboltahai.rbi.org.in) का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पोर्टल पर जाकर कोई भी व्यक्ति नोटों के असली होने की पहचान से जुड़े सुरक्षा फीचर्स को आसानी से देख और समझ सकता है।
निष्कर्ष
इस पहल से न केवल बैंकिंग प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई को ठगी से बचाने में सक्षम होगी।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह (मोतिहारी)
संपादन: सचचा समाचार टीम






