मोतिहारी, पूर्वी चंपारण। बिहार की खेल प्रतिभाओं को तराशने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को मोतिहारी के खेल भवन में तलवारबाजी (Fencing) एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए खिलाड़ियों का चयन ट्रायल आयोजित किया गया। इस ट्रायल के जरिए भविष्य के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैंपियन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
तीन जिलों के 70 खिलाड़ियों ने दिखाया दम
इस चयन प्रक्रिया में केवल पूर्वी चंपारण ही नहीं, बल्कि पश्चिमी चंपारण और शिवहर के खिलाड़ियों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। 12 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के लिए आयोजित इस ट्रायल में कुल 70 बच्चों ने अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसमें:
- बालक खिलाड़ी: 40
- बालिका खिलाड़ी: 30
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में हुआ ट्रायल
चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और मानकों के अनुरूप बनाने के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने अनुभवी प्रशिक्षकों को नियुक्त किया था। प्रशिक्षक श्री अनुराग चौधरी और श्री अंकित कुमार के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों की शारीरिक दक्षता और तलवारबाजी के तकनीकी कौशल की बारीकी से जांच की गई।
चयनित खिलाड़ियों को मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं
ट्रायल के आधार पर तैयार की गई मेधावी खिलाड़ियों की सूची अब जिला खेल कार्यालय द्वारा बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (पटना) को भेजी जाएगी। वहां से अंतिम मुहर लगने के बाद, चयनित खिलाड़ियों को बिहार सरकार द्वारा संचालित ‘एकलव्य राज्य तलवारबाजी प्रशिक्षण केंद्र’ में प्रवेश मिलेगा।
इन सुविधाओं का मिलेगा लाभ:
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- मुफ्त शिक्षा: खिलाड़ियों के पठन-पाठन की पूरी व्यवस्था।
- आवास और भोजन: रहने के लिए हॉस्टल और पौष्टिक आहार की सुविधा।
- उच्च स्तरीय ट्रेनिंग: प्रोफेशनल कोचों द्वारा खेल की बारीकियां सीखने का अवसर।
उद्देश्य: बिहार सरकार का मुख्य लक्ष्य इन सुविधाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को इस योग्य बनाना है कि वे राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।
खेल जगत की प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान खेल विभाग और स्थानीय खेल प्रेमी उपस्थित रहे। मौके पर मनोज कुमार प्रसाद, श्री अप्पु कुमार, राजन कुमार, संदीप कुमार और रमेश कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
संपादकीय संदर्भ: बिहार सरकार की ‘एकलव्य योजना’ का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि संसाधनों के अभाव में कोई प्रतिभा पीछे न छूटे।






