बिहार के मोतिहारी में आगामी 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इस संबंध में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में जिले के सभी थानाध्यक्षों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और सचिव ने की समीक्षा
बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री पुनीत कुमार तिवारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री नितिन त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक कानूनी मामलों का निपटारा करना और आम जनता को राहत पहुंचाना है।
नोटिस तामिला में लापरवाही पर दी गई चेतावनी
अधिकारियों ने निर्देश दिया कि लोक अदालत की सफलता के लिए नोटिस की तामिला (सर्विस) सबसे महत्वपूर्ण है।
- सभी संबंधित पक्षों को समय पर नोटिस मिलना चाहिए ताकि वे अदालत में उपस्थित हो सकें।
- थानाध्यक्षों को आदेश दिया गया कि वे अपने क्षेत्रों में लंबित मामलों की पहचान करें।
- आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मामलों को सुलझाने के लिए पक्षकारों को प्रेरित किया जाए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस कार्य में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अनुपस्थित थानाध्यक्षों को ‘कारण बताओ’ नोटिस
इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल न होने वाले थानाध्यक्षों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। प्रशासन ने अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही हिदायत दी गई है कि भविष्य में ऐसी बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराएं।
क्या है राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ?
लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाना है। इसमें मुख्य रूप से:
- बिजली बिल, बैंक लोन और दीवानी मामलों का निपटारा होता है।
- आपसी समझौते से मामले सुलझने पर दोनों पक्षों की जीत होती है।
- लोक अदालत के फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे कानूनी विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
मोतिहारी जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे 9 मई को आयोजित होने वाली इस लोक अदालत का लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों का शांतिपूर्ण निपटारा करें।






