लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर मशहूर गायिका कल्पना पटवारी ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने बिहार की पांच प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं—मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका—में सात गीतों की एक ‘छठ गीतमाला’ तैयार की है। बिहार के संगीत इतिहास में यह पहली बार है जब किसी एक गायिका ने इन सभी भाषाओं में एक साथ छठ गीत गाए हैं।
असम की बेटी का बिहार की संस्कृति से जुड़ाव
हाल ही में बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय कला पुरस्कार से सम्मानित कल्पना पटवारी मूल रूप से असम की रहने वाली हैं। सम्मान प्राप्ति के दौरान उन्होंने कहा था कि असम से होने के बावजूद उनका बिहार की लोक संस्कृति और गौरवशाली विरासत से गहरा लगाव है। अपनी इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इस साल छठ व्रतियों के लिए यह विशेष गीतमाला तैयार की है।
यूनेस्को डोजियर से लिए गए हैं गीत
इस ‘छठ गीतमाला’ की एक और खास बात यह है कि इसके गीत सीधे उस डोजियर (दस्तावेज) से जुड़े हैं, जिसे ‘इन्टैक’ (INTACH) ने छठ महापर्व को यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के लिए भेजा है।
इस डोजियर में हृदय नारायण झा द्वारा लिखित और संकलित पुस्तक ‘छठ गीत (सर्वसौभाग्यदायकम)’ को शामिल किया गया है। कल्पना पटवारी ने जो 7 गीत गाए हैं, वे इसी पुस्तक से लिए गए हैं। इन गीतों का वीडियो जल्द ही यूट्यूब चैनल ‘म्यूजिक बॉक्स’ (Music Box) पर रिलीज किया जाएगा।
‘छठ गीतमाला’ में शामिल 7 प्रमुख गीत
इस गीतमाला में श्रोताओं को कल्पना पटवारी की सुरीली आवाज में निम्नलिखित गीत सुनने को मिलेंगे:
- मैथिली: ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘कातिक मास इजोरिया ई दुई तिथि पावन हे’
- भोजपुरी: ‘जगत के पालक दीनानाथ कर दिहीं हमके सनाथ’ और ‘दरसन माँगीला तोहार हे गंगा मैया’
- मगही: ‘छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयाँ लोटे केस’
- अंगिका: ‘छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया’
- बज्जिका: ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल ओरियानी मोती चूए’
सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प
अपनी भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कल्पना पटवारी ने स्पष्ट किया कि बिहार एक गौरवशाली पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत वाला प्रदेश है। उन्होंने कहा कि यहां की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है और वे अपनी तरफ से इसके लिए हर संभव प्रयास करती रहेंगी।












