बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में मनरेगा (MGNREGA) के तहत रोजगार देने के मामले में भारी लापरवाही सामने आई है। मानव दिवस (Man-days) सृजन में यह जिला पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। इस खराब प्रदर्शन पर सख्त नाराजगी जताते हुए उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रदीप कुमार ने 187 पंचायत रोजगार सेवकों, सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों (PO) और कई इंजीनियरों का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया है।
यह फैसला 21 मई 2026 की शाम डॉ. राजेंद्र भवन सभागार में जल संसाधन विभाग और मनरेगा अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया।
मनरेगा कार्यों में खराब प्रदर्शन के आंकड़े
बैठक में पंचायतवार मनरेगा के तहत दिए गए रोजगार की समीक्षा की गई, जिसके परिणाम बेहद निराशाजनक रहे:
- 187 पंचायतें ऐसी पाई गईं, जहां 50 से भी कम मानव दिवस का सृजन हुआ।
- 116 पंचायतों में यह आंकड़ा केवल 50 से 100 के बीच रहा।
- सिर्फ 81 पंचायतें ही 100 से अधिक मानव दिवस सृजित करने में सफल रहीं।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
काम में शिथिलता और लापरवाही को देखते हुए डीडीसी ने सीधे तौर पर कड़ी कार्रवाई की है:
- रोजगार सेवक: 50 से कम मानव दिवस सृजित करने वाले 187 पंचायतों के रोजगार सेवकों का मानदेय (वेतन) रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- कार्यक्रम पदाधिकारी (PO): जब तक लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं होती, तब तक सभी PO का मानदेय स्थगित कर दिया गया है।
- इंजीनियर और तकनीकी सहायक: पर्याप्त संख्या में योजनाओं का प्राक्कलन (Estimate) न बनाने के कारण सभी पंचायत तकनीकी सहायकों और कनीय अभियंताओं का वेतन भी रोक दिया गया है।
- मेहसी के कनीय अभियंता किशुन दास और पहाड़पुर के तकनीकी सहायक शमशेर आलम से लापरवाही के आरोप में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- चकिया, ढाका और कोटवा के PO को विशेष रूप से 24 घंटे के भीतर काम न करने वाले रोजगार सेवकों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
असहयोग करने वाले मुखियाओं पर भी होगी कार्रवाई
बैठक में कई रोजगार सेवकों ने बताया कि योजनाओं को शुरू करने और उनकी फाइलें खोलने में कई स्थानीय मुखिया रुचि नहीं ले रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए DDC ने ऐसे मुखियाओं को चिन्हित कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है, ताकि उन पर मनरेगा अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सके।
25 मई तक काम शुरू करने का अल्टीमेटम
डीडीसी ने जल संसाधन और मनरेगा की लंबित योजनाओं को तुरंत धरातल पर उतारने के लिए समय-सीमा तय कर दी है:
- जिला औसत से पीछे चल रहे प्रखंडों को 25 मई 2026 तक अपने लक्ष्य का कम से कम 80% हर हाल में पूरा करना होगा।
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों को मनरेगा से जोड़कर 90 दिन की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा हो।
- जल संसाधन विभाग की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त सभी 614 योजनाओं को 25 मई तक शुरू कराने का निर्देश दिया गया है।
- जिन 294 योजनाओं की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनका मस्टर रोल (MR) तुरंत जारी कर कनीय अभियंताओं को सौंपा जाए ताकि जमीनी स्तर पर काम और रोजगार दोनों तेजी से शुरू हो सकें।
संवाददाता अमरजीत सिंह






