बिहार 

मोतिहारी: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निजी डॉक्टरों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

On: May 8, 2026 1:30 PM
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बिहार के मोतिहारी स्थित आईएमए (IMA) भवन में निजी चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी (क्षयरोग) के उन्मूलन के लिए डॉक्टरों को आधुनिक उपचार और सावधानियों के प्रति जागरूक करना था।

​टीबी उन्मूलन में निजी डॉक्टरों की भूमिका अहम

​यह कार्यशाला एचएलएफपीपीटी के प्रोजेक्ट ‘सशक्ति’ के तहत आयोजित की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को मरीजों की काउंसलिंग और सही इलाज पद्धति के बारे में विस्तार से बताया गया।

​सही डोज और पूरा कोर्स है सफलता की कुंजी

​कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मेजर डॉ. प्रियंका अग्रवाल ने टीबी के लक्षणों और उपचार पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  • इलाज की निरंतरता: मरीज को बिना किसी गैप के दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं की देखभाल: संक्रमित गर्भवती महिलाओं और एचआईवी पीड़ितों में टीबी के उपचार को लेकर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।
  • नियमित निगरानी: डॉक्टरों को मरीजों की दवाइयों की डोज और उनके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी करने की सलाह दी गई।

​ड्रग रेसिस्टेंट टीबी पर जीत संभव: डॉ. आशुतोष शरण

​बिहार आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष शरण ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि आज के समय में ‘ड्रग रेसिस्टेंट टीबी’ (जिस पर साधारण दवाएं असर नहीं करतीं) एक चुनौती है, लेकिन सही समय पर पहचान और सटीक इलाज से इसे भी ठीक किया जा सकता है।

​उन्होंने बताया कि इलाज के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी मरीज के ठीक होने में बड़ी भूमिका निभाता है। यदि मरीज बीच में दवा छोड़ देता है, तो बीमारी और गंभीर हो सकती है, इसलिए कोर्स पूरा करना सबसे जरूरी है।

​सरकार की ओर से मुफ्त जांच और दवा की सुविधा

​प्रशिक्षण शिविर में डॉक्टरों को सरकारी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई:

  1. मुफ्त जांच: सरकार द्वारा सीबी नॉट (CB-NAAT), ट्रू नॉट और एलपीए जैसी आधुनिक जांचें पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
  2. दवा की उपलब्धता: सदर अस्पताल यक्ष्मा केंद्र के एमओ डॉ. सुनील ने स्पष्ट किया कि जिले में दवाओं की कोई कमी नहीं है।
  3. सैंपल कलेक्शन: जिला यक्ष्मा केंद्र के अलावा निजी स्तर पर ‘शरण नर्सिंग होम’ में भी सैंपल कलेक्शन और मुफ्त दवा की सुविधा दी गई है ताकि मरीजों को भटकना न पड़े।

संवाददाता: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)

Sachcha Samachar Desk

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