बिहार 

मोतिहारी: अब आपके द्वार आएगा प्रशासन, पंचायत स्तर पर लगेंगे ‘सहयोग शिविर’

On: May 8, 2026 11:36 AM
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पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिला प्रशासन ने आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक बड़ी पहल की है। बिहार सरकार के निर्देश पर अब जिले की हर पंचायत में ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे नागरिकों को उनके घर के पास ही न्याय और समाधान दिलाना है।

​19 मई से होगा महाभियान का आगाज

​जिलाधिकारी (DM) के निर्देशानुसार, इस विशेष अभियान की शुरुआत 19 मई से होने जा रही है। पहले चरण में जिले के सभी 27 प्रखंडों की दो-दो पंचायतों (कुल 54 पंचायतें) में इन शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद, हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को रोस्टर के हिसाब से अलग-अलग पंचायतों में यह शिविर लगाए जाएंगे।

​जनता और प्रशासन के बीच बढ़ेगा तालमेल

​अक्सर ग्रामीणों को छोटी-छोटी शिकायतों के लिए जिला या अनुमंडल मुख्यालय तक जाना पड़ता है। ‘सहयोग शिविर’ के माध्यम से प्रशासन खुद जनता के पास पहुंचेगा। इन शिविरों में जिला और अनुमंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो मौके पर ही शिकायतों को सुनेंगे और उनका निपटारा करेंगे।

​किन पंचायतों में कब लगेगा शिविर? (19 मई की सूची)

​19 मई को होने वाले पहले चरण के लिए कुछ प्रमुख पंचायतों की सूची इस प्रकार है:

  • आदापुर प्रखंड: आंधरा और मझरिया (नोडल पदाधिकारी: उप विकास आयुक्त)।
  • रक्सौल प्रखंड: नोनियाडीह और धनगढ़वा कौड़िहार।
  • मोतिहारी प्रखंड: झीटकहिया और नौरंगिया।
  • चकिया प्रखंड: चिंतामणपुर और जमुनिया।
  • अरेराज प्रखंड: बभनौली और रढिया।
  • केसरिया प्रखंड: पूर्वी और पश्चिमी सरोतर। (इसी प्रकार जिले के सभी 27 प्रखंडों की चयनित दो-दो पंचायतों में शिविर आयोजित होंगे।)

​पारदर्शी व्यवस्था: पोर्टल पर होगी शिकायतों की ट्रैकिंग

​प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को जवाबदेह बनाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:

  1. 30 दिन पहले आवेदन: शिविर लगने से 30 दिन पहले ही आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
  2. डिजिटल रसीद: पंचायत के कार्यपालक सहायक हर आवेदन का पंजीकरण करेंगे और आवेदक को रसीद देंगे।
  3. ऑनलाइन पोर्टल: सभी प्राप्त आवेदनों को जिला स्तर के पोर्टल पर प्रतिदिन अपलोड किया जाएगा, ताकि उनकी निगरानी की जा सके।
  4. लंबित मामलों पर जोर: जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि शिविर से पहले ही पुराने आवेदनों का निपटारा कर लिया जाए ताकि शिविर के दिन नए मामलों पर ध्यान दिया जा सके।

​सरकारी योजनाओं की भी मिलेगी जानकारी

​ये शिविर सिर्फ शिकायतें सुनने के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि यहाँ केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इससे ग्रामीण जागरूक होंगे और सीधे तौर पर सरकारी लाभ उठा सकेंगे। शिविर स्थल पर पेयजल, बैठने की व्यवस्था और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा।

निष्कर्ष: ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के लक्ष्य के साथ शुरू की गई यह पहल बिहार में सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि आम आदमी का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी मजबूत होगा।

Sachcha Samachar Desk

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