बिहार सरकार के ‘आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय-2’ अभियान के तहत मोतिहारी में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को नगर निगम क्षेत्र में एक विशेष पशु बांझपन निवारण शिविर का आयोजन किया गया।
विशेषज्ञों ने किया दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ
इस कार्यक्रम की शुरुआत मोतिहारी के पशु शल्य चिकित्सक डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव, सपहीडीह के भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय समीर भंवर और एम.वी.यू. मोतिहारी के डॉ. ब्रज किशोर शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की।
इस अवसर पर स्थानीय पशुपालक, ग्रामीण और कई क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिनमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखी गई।
पशुपालन को लाभकारी बनाने के लिए जागरूकता जरूरी
शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य पशु शल्य चिकित्सक डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पशुपालन को मुनाफे का व्यवसाय बनाने के लिए पशुओं का स्वस्थ होना और उनकी उत्पादकता का बढ़ना अनिवार्य है। उन्होंने पशुपालकों को बांझपन के मुख्य कारणों के बारे में विस्तार से समझाया:
- कुपोषण: पशुओं को सही और संतुलित आहार न मिलना।
- मदचक्र (Heat Cycle) की कमी: पशुपालकों को पशु के गर्मी में आने के सही समय की जानकारी न होना।
- संक्रमण और बीमारियां: गर्भाशय में संक्रमण या जन्मजात दोष।
- हार्मोन असंतुलन: शरीर में हार्मोन की कमी या गड़बड़ी के कारण गर्भधारण न कर पाना।
मुफ्त जांच और दवाओं का वितरण
शिविर के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने उपस्थित पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के बाद पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं और टॉनिक भी मुफ्त में वितरित किए गए।
डॉक्टरों ने सलाह दी कि यदि पशुपालक प्रबंधन की छोटी-छोटी त्रुटियों को सुधार लें और सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें, तो बांझपन जैसी बड़ी समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है।
सफल आयोजन में इनका रहा योगदान
इस विशेष शिविर को सफल बनाने में डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विजय समीर भंवर, डॉ. ब्रज किशोर शर्मा और पशुधन सहायक श्री राज कुमार गुप्ता की सक्रिय भूमिका रही। विभाग का लक्ष्य है कि इस तरह के आयोजनों से जिले के किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि की जा सके।






