बिहार के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी प्रेक्षागृह परिसर में आयोजित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की चार दिवसीय प्रदर्शनी का भव्य समापन हो गया। 15 से 18 अप्रैल तक चली इस प्रदर्शनी में देश की अत्याधुनिक सैन्य शक्ति और तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े।
शक्ति का आधार है विज्ञान: राधा मोहन सिंह
समापन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और रक्षा संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने डीआरडीओ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगठन का मुख्य लक्ष्य भारत को रक्षा तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। डीआरडीओ का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानम्” (शक्ति का आधार विज्ञान है) इस बात का प्रमाण है कि बिना वैज्ञानिक उन्नति के कोई भी राष्ट्र शक्तिशाली नहीं बन सकता।
उन्होंने गर्व के साथ बताया कि आज भारत के पास अग्नि, पृथ्वी, नाग, त्रिशूल और आकाश जैसी मिसाइलों के साथ-साथ दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ मौजूद है, जिसका श्रेय डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को जाता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में डीआरडीओ की अहम भूमिका
राधा मोहन सिंह ने हालिया सैन्य सफलताओं का जिक्र करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ द्वारा विकसित उपकरणों ने पड़ोसी देश की रक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्प्रभावी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों के हाथों में जो आधुनिक हथियार और शक्ति है, वह प्रयोगशालाओं में दिन-रात मेहनत करने वाले वैज्ञानिकों के परिश्रम का परिणाम है।
रक्षा के साथ जनसेवा में भी आगे है डीआरडीओ
यह प्रदर्शनी केवल हथियारों तक सीमित नहीं थी। वक्ताओं ने बताया कि डीआरडीओ की तकनीक का लाभ आम नागरिकों को भी मिल रहा है:
- चिकित्सा और आपदा प्रबंधन: आपात स्थितियों में जीवन रक्षक तकनीकें।
- कृषि और खाद्य: उन्नत खेती और खाद तकनीक।
- पर्यावरण और ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा और सामग्री विज्ञान में अनुसंधान।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए नई सोच: ‘आखिरी’ नहीं, अब ‘पहले’ गांव
समारोह के दौरान देश की बदलती रणनीतिक सोच पर भी चर्चा हुई। पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा गया कि अब सीमावर्ती गांवों को उपेक्षित नहीं छोड़ा जा रहा है।
‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ (VVP) के माध्यम से सरकार अब सीमा पर बसे गांवों को देश का “आखिरी गांव” नहीं, बल्कि “पहला गांव” मानकर वहां विकास कर रही है। इसके तहत लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के हजारों गांवों में सड़क, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस भव्य समापन अवसर पर मोतिहारी के विधायक प्रमोद कुमार, पिपरा विधायक श्यामबाबू प्रसाद, चिरैया विधायक लालबाबू गुप्ता, नरकटिया विधायक विशाल शाह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। डीआरडीओ के चीफ इंजीनियर डॉ. बी.के. सिंह और वैज्ञानिकों की टीम ने लोगों को रक्षा प्रणालियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस प्रदर्शनी ने न केवल युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि जगाई, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को हकीकत में बदलते हुए भी दिखाया।






